सुखद खबर:25 होटलों में एसटीपी लगे, रोज 1.25 लाख ली. पानी बचत, 430 में लगे तो 1.50 लाख लीटर बचेगा

शहर की झीलों, अरावली और हरियाली के लिए सुखद खबर है। शहर के 25 होटल-रिसॉर्ट ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाने की पहल की है। एक होटल में औसत 50 लोगों के हिसाब से कुल 1250 पर्यटक रोज इनमें ठहरते हैं। एक सामान्य शावर हेड पर प्रति मिनट लगभग 12 लीटर पानी खर्च होता है यानी 10 मिनट के शावर हेड में 120 लीटर पानी खर्च होता है। कुल पानी खर्च को प्रति व्यक्ति 100 लीटर भी माना जाए तो 1.25 लाख लीटर पानी का उपयोग हो रहा है। एसटीपी लगने के बाद इन होटल-रिसॉर्ट में यह पूरा पानी ट्रीटेड करने के बाद फिर से उपयोग लायक बनाया जा रहा है। इसका उपयोग पेड़-पौधों, गार्डन सहित अन्य कामों में में किया जा रहा है। यानी सिर्फ 5 होटलों में एसटीपी लगने से लेकसिटी में रोज 1.25 लाख लीटर पानी की बचत हो रही है।
दूसरी ओर, टूरिस्ट सिटी उदयपुर सहित राजसमंद-चित्तौड़गढ़ जिले की उदयपुर से सटी सीमाओं में बड़े होटल्स-रिसॉर्ट्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। उदयपुर में 100 से ज्यादा कमरों वाले 70 होटल-रिसॉर्ट्स और 50 से 100 तक कमरों वाले 360 होटल-रिसॉर्ट्स हैं। जबकि, 50 से 200 तक कमरों से अधिक वाले 130 होटल-रिसॉर्ट्स निर्माणाधीन हैं। ये आगामी एक से दो साल में बनकर तैयार हो जाएंगे। वर्तमान में 430 बड़े होटल्स-रिसॉर्ट्स संचालित हैं। एक में औसत 50 लोगों के हिसाब से 430 होटल्स-रिसॉर्ट्स में रोज औसतन 21 हजार 500 पर्यटक/स्टाफ के ठहरने का अनुमान है। अगर इन सभी होटल-रिसॉर्ट में एसटीपी स्थापित कर दिए जाएं तो 21500 लोगों पर रोज औसतन 21.50 लाख लीटर और प्रतिवर्ष 78.47 करोड़ लीटर पानी की बचत होगी। इससे भूजल स्तर भी सुधरेगा। उदयपुर की झीलें भी प्रदूषण मुक्त रह सकेंगी। हरियाली भी बढ़ेगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण-संवर्धन की नई दिशा भी तय होगी। एसटीपी बनने से आयड़ से लेकर उदयसागर तक नहीं घुलेगा जहर बड़े होटल्स-रिसॉर्ट्स की ओर से एसटीपी स्थापित करने से आयड़ नदी व आयड़ होते हुए उदयसागर झील में पहुंचने वाले सीवेज को रोकने की दिशा में भी बड़ा कदम होगा। वर्तमान में नगर निगम के स्थापित एसटीपी 60 प्रतिशत सीवेज को ट्रीट कर पा रहे हैं। शेष 40 प्रतिशत प्रदूषित मल-जल आयड़ नदी होते हुए उदयसागर पहुंच रहा है। इससे झील-नदी दोनों की सेहत खराब हो रही है। नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना का कहना है कि सरकारी नियम हैं कि उन होटल्स-रिसॉर्ट्स को एसटीपी लगाने की जरूरत नहीं है, जिनके पास सीवेज लाइन के कनेक्शन हैं। इसी नियम की आड़ में बड़े होटल्स-रिसॉर्ट्स बच रहे हैं, जबकि एसटीपी स्थापित कर समाज के लिए भी स्वत: अच्छा काम कर सकते हैं। भास्कर एक्सपर्ट-9 से 11 मीटर तक गिर जाता है स्तर, चिंताजनक जल संरक्षण-संवर्धन के लिए काम करने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट तेज शंकर पालीवाल बताते हैं कि उदयपुर में साल 2024 व 2025 में भूजल स्तर मानसून से पहले औसत 9 मीटर नीचे रहा। साल 2023 में सामान्य बारिश हुई। तब भी भूजल स्तर मानसून से पहले 10.06 मीटर नीचे था। वर्ष 2022 में मानसून से पहले भूजल 11.6 मीटर पर चला गया। तब 44% ज्यादा बारिश हुई। मानसून के बाद पानी 4.95 मीटर नीचे जाने पर ही मिलने लगा, लेकिन 2023 का मानसून आने से पहले यह 10.06 तक ही गिर पाया। अपने पहले वाले स्तर 11.6 मीटर से 1.54 मीटर ऊपर ही रहा। ऐसे ही वर्ष 2019 में मानसून से पहले पानी 11.78 मीटर के स्तर पर था। मानसून में 68.4% ज्यादा बारिश हुई तो यह 3.61 मीटर पर ही मिलने लगा। बाद में 2020 का मानसून आने से पहले तक यह 10.07 मीटर पर ही मिलने लगा, जबकि पहले 11.78 मीटर पर मिल रहा था।

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