सुखाड़िया यूनिवर्सिटी का दीक्षांत समारोह, 255 को PHD उपाधि:राज्यपाल बोले – आजीवन नया सीखते रहना ही विद्यार्थी का सच्चा कर्तव्य, गेस्ट फ़ैकल्टी के से यूनिवर्सिटी नहीं चलती

उदयपुर की मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के 33वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल और कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत शिक्षा की समाप्ति नहीं, बल्कि जीवन की नई शुरुआत है। यहां से विद्यार्थी अपने अर्जित ज्ञान को समाज और देश के हित में प्रयोग करने की दिशा में आगे बढ़ते हैं। उन्होंने रविवार को आरएनटी मेडिकल कॉलेज सभागार में आयोजित दीक्षांत समारोह में शैक्षणिक सत्र 2024 के अंतर्गत विभिन्न संकायों के 91 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और प्रायोजित स्मृति पुरस्कार एवं 255 शोधार्थियों को पीएचडी प्रदान की। इस अवसर पर राज्यपाल ने नवनिर्मित फ़ार्मेसी भवन का डिजिटल उद्घाटन भी किया। इस दौरान राज्यपाल ने तैत्तिरीय उपनिषद् का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें आचार्य द्वारा दी जाने वाली अंतिम शिक्षा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। उपनिषद् के अनुसार विद्यार्थी को सदा सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए और धर्म का आचरण करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यहाँ धर्म का अर्थ कर्तव्य का पालन है। उनका कहना था कि आजीवन कुछ नया सीखते रहना और मानवता के कल्याण के लिए कार्य करना ही विद्यार्थी का सच्चा कर्तव्य है। उन्होंने प्राचीन गुरु–शिष्य परंपरा का स्मरण करते हुए कहा कि पहले शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं थी, बल्कि गुरु शिष्य के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देते थे। आज का दीक्षांत समारोह उसी परंपरा का आधुनिक स्वरूप है। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी डिग्री और ज्ञान का उपयोग केवल व्यक्तिगत उन्नति के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में करें।
मेवाड़ की ऐतिहासिकता के साथ सांगा और मीरा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा हमारा अपना समृद्ध इतिहास है फिर भी हम बरसों तक मुगलों का इतिहास पढ़ाते रहे, यह परिपाटी बदलनी चाहिए।
अपने संबोधन में उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि नैक से ‘ए’ ग्रेड और एनआईआरएफ रैंकिंग में स्थान मिलना संस्थान की गुणवत्ता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों और कर्मचारियों को इन उपलब्धियों के लिए बधाई दी। राज्यपाल ने कहा कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छी नौकरी पाना नहीं है, बल्कि नैतिकता, चरित्र, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से संवेदनशील, जागरूक और विचारशील नागरिक बनने की अपेक्षा जताई। साथ ही उन्होंने युवाओं को स्टार्टअप, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में दीक्षांत भाषण पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने दिया। उन्होंने छात्राओं को बधाई देते हुए कहा की आज स्वर्ण पदक व डिग्री प्राप्त करने में वे संख्यात्मक तौर पर अव्वल रही है। कटारिया ने कहा की आज पढ़ने के बाद सब पैकेज के पीछे भाग रहे है लेकिन पैकेज से कोई बड़ा नहीं होता बल्कि नम्रता और सद्व्यवहार से बड़ा होता है। उन्होंने कहा कि गुरु का पद सबसे ऊँचा होता है क्योकि वह बच्चे का चरित्र गढ़ता है। कटारिया ने उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा से कहा कि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के ढेरों पद ख़ाली पड़े हुए है उन पर नियुक्ति का प्रयास भी किए जाने चाहिए। क्योंकि गेस्ट फ़ैकल्टी के ज़रिए विश्वविद्यालय नहीं चलते और ख़ाली पदों से ना विश्वविद्यालयों का भला होता है ना बच्चो का भला होता है। उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि राजस्थान में नए महाविद्यालयों की स्थापना, संरचनागत विकास तथा शिक्षकों की नियुक्ति की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है, जिससे उच्च शिक्षा में सकल नामांकन बढ़ा है। विशेषकर महिलाओं की भागीदारी खास रही है। राज्य मंत्री प्रो. मंजू बाघमार ने कहा कि नई शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए कहा कि यह शिक्षा, कौशल विकास, रचनात्मकता और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देती है तथा नौकरी पाने के बजाय रोजगार देने की क्षमता विकसित करने पर बल देती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और उपाधियों का उपयोग देश और समाज की प्रगति के लिए करने की अपील की। 255 शोधार्थियों को पीएच.डी. उपाधि
समारोह में इस वर्ष कुल 255 शोधार्थियों को विद्या-वाचस्पति (पीएच.डी.) की उपाधि प्रदान की गई। इसमें 111 छात्र एवं 144 छात्राएं शामिल हैं। वही कुलाधिपति स्वर्ण पदक 8 छात्राओं को, विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक 90 विद्यार्थियों (15 छात्र एवं 75 छात्राएं) को और प्रायोजित स्वर्ण पदक 11 विद्यार्थियों (1 छात्र एवं 10 छात्राएं) को प्रदान किए गए।

समारोह में कुलगुरु प्रो बीपी सारस्वत ने विश्वविद्यालय की वर्ष भर की उपलब्धियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। संचालन रजिस्ट्रार डॉ बीसी गर्ग ने किया। कार्यक्रम में विधायक तारा चंद जैन,उदयलाल दांगी और प्रताप भील के साथ ही राज्यपाल के सलाहकार प्रो कैलाश सोढानी, वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा के कुलगुरु प्रो बीएल वर्मा मौजूद रहे।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *