लुधियाना| किचलू नगर स्थित जैन स्थानक में आयोजित धर्म समागम के दौरान भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में श्रावक-श राविकाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।। समागम को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध वक्ता सुधीर मुनि महाराज ने कहा कि प्रतिकूलता और अनुकूलता को दरकिनार कर नियमित रूप से सत्संग में पहुंचना श्रावकों के जिनवाणी के प्रति अटूट समर्पण और श्रद्धा भाव को दर्शाता है। उन्होंने तेज बारिश के दौरान पहुंचे सभी सत्संगियों की श्रद्धा, भक्ति और समर्पण की खुले मन से सराहना की। समागम के दौरान तपस्वी आयम्बिल तप की साधना में लीन रहे। अपराह्न 4 से 5 बजे तक महामंत्र नवकार के सामूहिक जाप का आयोजन हुआ जिसका प्रबंध जैन सभा के महामंत्री संजीव जैन शाह ने किया। साध्वी माधवी महाराज ने सुमधुर भजन प्रस्तुत किया वहीं युगपुरुष सुभाष मुनि महाराज ने मंगलाचरण एवं मंगल पाठ सुनाकर संगत को भाव-विभोर किया और मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। जीवात्मा को होता है हेय, ज्ञेय व उपादेय का बोध सुधीर मुनि महाराज ने कहा, जिनवाणी का श्रवण पूर्व जन्मों के महान पुण्योदय से ही प्राप्त होता है। वीतराग प्रभु के वचनों को सुनकर ही जीवात्मा को हेय, ज्ञेय और उपादेय का बोध होता है। उन्होंने कहा कि प्रभु वाणी को सुनकर ही जीवात्मा जहां पाप, आश्रव व बंध को छोड़ती है वहीं पाप मार्ग का त्याग एवं कर्म बंधन की क्रियाओं को त्याग करती है। जड़ व चेतन का बोध और पुण्य के मार्ग को जानकर संवर व निर्जरा के पथ पर चलकर मुक्ति का वरण करता है। तप, त्याग और सेवा के माध्यम से जन्म-जन्मांतरों के बंधे कर्मों को नष्ट किया जा सकता है, इसीलिए श्रवण परम आवश्यक है।


