BJP ने जेपी नड्डा की जगह नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया है। इसके बाद पंजाब के BJP प्रधान सुनील जाखड़ को लेकर अटकलें लग रही हैं कि वह पद पर रहेंगे या फिर उनकी जगह कोई दूसरा चेहरा आएगा। असल में जाखड़ लोकसभा चुनाव में हार के बाद जून 2025 में ही इस्तीफा दे चुके हैं। मगर, नड्डा ने भाजपा अध्यक्ष रहते हुए इसे स्वीकार नहीं किया। हालांकि अश्वनी शर्मा को वर्किंग प्रधान जरूर लगा दिया था। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा की पुरानी लीडरशिप अकेले विधानसभा चुनाव लड़ने पर अड़ी है लेकिन कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह अकाली दल के साथ गठबंधन की पैरवी कर रहे हैं। सुनील जाखड़ भी उनके बयान के खिलाफ नहीं हैं। हालांकि सुनील जाखड़ भाजपा के प्रधान बने रहेंगे या जाएंगे, ये सब नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पर डिपेंड करेगा। सियासी गलियारों में ये भी चर्चा है कि भाजपा किसी सिख चेहरे पर भी दांव खेल सकती है क्योंकि वर्किंग प्रधान अश्वनी शर्मा और जाखड़, दोनों हिंदू चेहरे हैं। सुनील जाखड़ ने इस्तीफा क्यों दिया था
सुनील जाखड़ जुलाई 2023 में पंजाब भाजपा अध्यक्ष बने। उनकी अगुआई में 2024 के लोकसभा चुनाव हुए। इसमें भाजपा पंजाब की 13 में से एक भी सीट नहीं जीत पाई। जिसके बाद उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को इस्तीफा सौंप दिया। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनावों की तुलना में भाजपा का वोट शेयर दोगुना हो गया था। जाखड़ भी इस्तीफे को लेकर कह चुके हैं कि अभी इसे हाईकमान ने स्वीकार नहीं किया है। 2 पॉइंट, जिससे जाखड़ के ही प्रधान बने रहने के संकेत 3 साल का कार्यकाल भी जुलाई में खत्म हो रहा
भाजपा का सूबा प्रधान 3 साल के लिए चुना जाता है। 2023 में चुने गए सुनील जाखड़ का कार्यकाल जुलाई 2026 तक है। इसके बाद 2027 के पंजाब में विधानसभा चुनाव होंगे। इससे पहले भाजपा का फोकस इस बात पर है कि पार्टी मौजूदा व्यवस्था को ही जारी रखेगी या कोई बड़ा बदलाव करेगी। 16 जनवरी को जाखड़ ने सीएम भगवंत मान के आवास के बाहर कानून-व्यवस्था और अन्य राज्य मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। न केवल खुद पहुंचे बल्कि प्रदर्शन का चेहरा भी बने। यहां हेल्थ प्रॉब्लम के कारण उनको मोहाली फोर्टिस अस्पताल में भर्ती भी कराया गया, लेकिन उनके तेवर कम नहीं हुए। लीडरशिप में ट्रिपल इंजन का फॉर्मूला भी अपना सकती भाजपा
माझा-मालवा और दोआबा में बंटे पंजाब के तीनों क्षेत्रों की राजनीति अलग है। मालवा को जीतने वाले ही सरकार बनाने के रास्ते पर आगे बढ़ते हैं। राजनीतिक रूप में सबसे कमजोर क्षेत्रों पर भाजपा का फोकस है। सुनील जाखड़ मालवा बेल्ट से आते हैं। इसलिए उनको प्रधान पद से हटाना भी भाजपा के सामने चुनौती रहेगा। माझा में सुनील जाखड़ की बहुत पकड़ नहीं हैं। कांग्रेस में रहते हुए सुनील जाखड़ गुरदासपुर लोकसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। इस चुनाव में उनको हार का सामना करना पड़ा था। माझा के पठानकोट-गुरदासपुर में मजबूत रह चुकी भाजपा ने यहां से पठानकोट के विधायक अश्विनी शर्मा को मौका दिया है। उनको 7 जुलाई 2025 को कार्यकारी प्रधान लगा दिया है। दोआबा के जालंधर, होशियारपुर में मजबूत रही पार्टी अपना आधार वापस पाने के लिए अब ट्रिपल इंजन पर भी विचार कर सकती है। दोआबा के रूप में भाजपा का कोई भी इंजन अभी सक्रिय नहीं है। फिलहाल पंजाब भाजपा इंतजार करो और देखो की स्थिति में है और सभी की निगाहें राष्ट्रीय नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं। चुनाव से पहले BJP पंजाब में क्या रणनीति खेल रही सिख-हिंदू वोटर का संतुलन बना रही BJP
पंजाब में BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती गांवों में सिख-हिंदू वोटर को साधना है। शहरों में बीजेपी खुद को मजबूत होने के दावा करती है। इस कड़ी में भाजपा के पास सुनील जाखड़ मालवा का बड़ा और नॉन कंट्रोवर्शियल हिंदू चेहरा हैं जिनकी सिख समुदाय में भी पैठ है। गांवों और किसानों में भी सुनील जाखड़ का आधार है, उनके मुद्दों को समझते हैं। इसके साथ ही अश्वनी शर्मा पठानकोट के साथ ब्राह्मण वोटों को साधते हैं। पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं और शहरी हिंदू मतदाताओं के बीच पकड़ रखते हैं। पार्टी इन दोनों के जरिए हिंदू-सिख एकता का संदेश दे रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भले ही भाजपा कोई सीट नहीं जीत पाई, लेकिन उसका वोट शेयर 14 से लगभग 18% तक पहुंचा था। इसके साथ ही भाजपा हाईकमान पंजाब को और गहराई से समझने के लिए अकाली और कांग्रेस नेताओं को भी साथ लेकर आई है। इसमें मनप्रीत सिंह बादल, अमरिंदर सिंह (कैप्टन) प्रमुख हैं। भाजपा में शामिल किए सिख चेहरे
भाजपा ने हाल ही में चंडीगढ़ में पूर्व सांसद जगमीत सिंह बराड़, पूर्व विधायक रिपजीत सिंह बराड़,शिरोमणि अकाली दल के पूर्व वरिष्ठ नेता चरणजीत सिंह बराड़ और CM भगवंत मान के पूर्व OSD ओंकार सिंह को शामिल किया। इसके साथ ही किसान नेता प्रीतपाल सिंह और लोक भलाई पार्टी के कुलवंत सिंह को भी सदस्यता दिलाई। इन नेताओं का शामिल होना 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा की माइक्रो-मैनेजमेंट रणनीति का हिस्सा है। मालवा क्षेत्र में और मजबूती के लिए जगमीत बराड़ को शामिल किया गया है। बराड़ परिवार का मालवा क्षेत्र प्रभाव है। भाजपा इनके जरिए ग्रामीण और जट्ट-सिख मतदाताओं के बीच पैठ बनाना चाहती है। इसी के साथ चरणजीत सिंह बराड़ को मिलाकर भाजपा ने शिरोमणि अकाली दल के कैडर वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है। आप की अंदरूनी राजनीति को साधने के लिए सीएम मान के पूर्व ओएसडी रहे ओंकार सिंह को भाजपा इस्तेमाल कर सकती है। किसान नेता प्रीतपाल सिंह को लाकर भाजपा पंजाब में किसान विरोधी इमेज सुधारने की कोशिश कर सकती है।


