सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक:न्यूरोलॉजी कैथ लैब लगेगी, मशीन से होगा ब्रेन का क्लॉट रिमूव

नए साल में सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में संभाग की पहली न्यूरोलॉजी कैथ लैब इंस्टॉल होगी। इसके साथ 10 बेड की स्ट्रोक यूनिट भी बनेगी। इस पर 12.50 करोड़ खर्च आएगा। एसपी मेडिकल कॉलेज ने इसके प्रस्ताव सरकार को भेज दिए हैं। नए बजट में इसके मंजूर होने की उम्मीद लगाई जा रही है। बीकानेर के पीबीएम हॉस्पिटल में हार्ट की तरह अब न्यूरोलॉजी विभाग में भी कैथ लैब पर ब्रेन और स्पाइन की रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों का इलाज शुरू हो जाएगा। इसके लिए न्यूरोलॉजी कैथ लैब और 10 बेड की स्ट्रोक यूनिट एसएसबी में इंस्टॉल की जाएगी। इस मशीन के आने से लकवे के मरीजों का गोल्डन ऑवर में उपचार संभव होगा। ब्रेन में पतला सा वायर डालकर उनका क्लॉट रिमूव किया जा सकेगा। दोबारा लकवा न हो, इसके लिए ब्रेन से गर्दन में आने वाली रक्त वाहिका में कैरोटिड स्टेंटिंग की जाएगी। राज्य में बीकानेर और अजमेर मेडिकल कॉलेज को छोड़कर न्यूरोलॉजी कैथ लैब संभाग स्तरीय सभी मेडिकल कॉलेजों में है। बीकानेर के मरीजों को इसके लिए जयपुर जाना पड़ता है। तब तक गोल्डन ऑवर निकल जाते हैं। भास्कर नॉलेज : अत्याधुनिक उपकरणों से होगा इलाज न्यूरोलॉजी कैथ लैब (न्यूरो इंटरवेंशनल कैथ लैब) एक विशेष प्रयोगशाला है, जहां मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल कॉर्ड) की रक्त वाहिकाओं (ब्लड वेसल्स) से जुड़ी बीमारियों का इलाज अत्याधुनिक उपकरणों जैसे बायप्लेन कैथ लैब की मदद से किया जाता है। बिना बड़ी सर्जरी के इसमें स्ट्रोक (क्लॉट रिमूवल), ब्रेन एन्यूरिज्म की मरम्मत और एवीएम जैसी जटिल समस्याओं का इलाज किया जाता है, जिससे सटीक निदान और कम इनवेसिव प्रक्रियाएं संभव होती हैं। न्यूरोलॉजी कैथ लैब के फायदे “बीकानेर में न्यूरोलॉजी कैथ लैब की जरूरत है। मरीजों को इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है। इसके प्रस्ताव प्रिंसिपल के जरिए सरकार को भेज दिए गए हैं।” — डॉ. संजीव बुरी, अधीक्षक, एसएसबी नई टेक्नोलॉजी है, स्टेंट भी यहीं डाले जाएंगे, लकवे के मरीजों को मिलेगा फायदा यह एक उन्नत कैथ लैब होती है, जिसमें विशेष इमेजिंग उपकरण लगे होते हैं, जो मस्तिष्क और रीढ़ की नसों को स्पष्ट रूप से देखने में मदद करते हैं। इसमें पतली ट्यूब (कैथेटर) को शरीर में डालकर रक्त वाहिकाओं के जरिए दिमाग तक पहुंचाया जाता है। फिर कंट्रास्ट डाई डालकर एक्स-रे (एंजियोग्राफी) के जरिए समस्याओं का पता लगाया जाता है। इस मशीन के आने से हर महीने 30 से अधिक मरीजों को फायदा होगा। इसमें दो एक्स-रे स्रोत और डिटेक्टर होते हैं, जो एक साथ कई कोणों से इमेज लेते हैं, जिससे मस्तिष्क की जटिल संरचनाओं को 3डी में समझने और सटीक इलाज करने में मदद मिलती है।

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