सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ के शाइन सिटी घोटाले में गिरफ्तार शशि बाला सिंह को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 45 के तहत दी गई दलीलों पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें अस्वीकार कर दिया। जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्जल भुयान की पीठ ने साफ तौर पर कहा, “हम भारत सरकार की ओर से ऐसी किसी भी दलील को बर्दाश्त नहीं करेंगे, जो कानून के प्रावधानों और संविधान के विपरीत हो।” यह टिप्पणी उस वक्त आई जब ED ने दलील दी कि PMLA की धारा 45 के तहत महिलाएं विशेष प्रावधानों से प्रभावित नहीं होंगी। कोर्ट ने इसे संविधान और कानून की मूल भावना के खिलाफ बताते हुए खारिज कर दिया। सरकारी स्कूल की टीचर पर धोखाधड़ी में संलिप्तता का आरोप शाइन सिटी घोटाले में आरोपी सरकारी स्कूल की टीचर शशि बाला सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की दलीलों को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि केवल महिला होने के आधार पर जमानत नहीं दी जा रही, बल्कि संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है। सॉलिसिटर जनरल (SG) ने इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए मोहलत मांगी। जस्टिस अभय एस. ओका ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा, “मिस कम्युनिकेशन का कोई सवाल नहीं है। हम यूनियन ऑफ इंडिया की ऐसी दलीलों की सराहना नहीं करेंगे।” क्या है पूरा मामला? सरकारी स्कूल की शिक्षिका शशि बाला सिंह पर शाइन सिटी ग्रुप ऑफ कंपनीज के जरिए अपराध की आय को छिपाने और धोखाधड़ी करने का आरोप है। ED के मुताबिक, शशि बाला ने कंपनी के डायरेक्टर राशिद नसीम की विश्वासपात्र के रूप में काम किया और निवेशकों को ठगने में उसकी मदद की। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता और अपराध की आय में उनकी कथित संलिप्तता को देखते हुए पहले उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। कोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने ED की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि PMLA के प्रावधान महिलाओं पर लागू नहीं होंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के विपरीत दलीलों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। शशि बाला सिंह को शाइन सिटी घोटाले में ED ने गिरफ्तार किया था। घोटाले में कई निवेशकों के करोड़ों रुपए फंसे हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए कहा कि संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों का पालन करना सभी पर अनिवार्य है, और कानून के विपरीत कोई भी दलील स्वीकार्य नहीं होगी।


