सुप्रीम कोर्ट ने चंदन नगर थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए उन्हें कार्य से हटाने के मौखिक निर्देश दिए हैं। थाने में दर्ज होने वाले प्रकरण में पटेल अपने बनाए हुए गवाहों के बयान करवा देते थे। दर्जनों प्रकरण में एक ही गवाह को सबूत के रूप में पेश करवा देते थे। कोर्ट ने माना कि उनकी यह बदमाशी है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से यह सामने आया है कि संबंधित अधिकारी ने अपने ही बनाए गवाहों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया, जो आपराधिक न्याय प्रणाली की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह टिप्पणी मंगलवार 13 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान की गई। मामला एक आरोपी की जमानत याचिका से जुड़ा है, जिसकी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सामने यह तथ्य आया कि पुलिस द्वारा अदालत में पेश किए गए रिकॉर्ड में एक ही गवाहों के नाम दर्जनों और सैकड़ों मामलों में दोहराए गए हैं। कोर्ट ने पाया कि कुछ गवाहों को अलग-अलग मामलों में नियमित रूप से पेश किया गया, जबकि मामलों की प्रकृति और घटनास्थल अलग थे। सरकार से पूछा-क्या कार्रवाई की
सुप्रीम कोर्ट ने इंद्रमणि पटेल को तत्काल प्रभाव से काम से हटाने के निर्देश दिए और राज्य सरकार से पूछा कि ऐसे मामलों में अब तक क्या विभागीय कार्रवाई की गई है। मामले की अगली सुनवाई में विस्तृत जवाब और रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिवक्ता मनोज बिनीवाले के मुताबिक चंदन नगर ही नहीं बल्कि शहर के कई थानों में गवाह बाकायदा नियुक्त हैं। जांच अधिकारी मौके पर जाकर जांच, गवाहों की सूची तैयार नहीं करते बल्कि अपने ही मुखबिर या एजेंट को सिखा-पढ़ाकर कोर्ट में पेश कर देते हैं। एएसपी के फर्जी साइन करने वाला बर्खास्त एएसआई बहाल, लेकिन सिपाही बनाया पुलिस महकमे में एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां फर्जीवाड़े में छीनी गई खाकी तो वापस मिल गई, लेकिन रसूख पूरी तरह खत्म हो गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. संजीव उईके के फर्जी हस्ताक्षर करने के मामले में बर्खास्त किए गए बहरोल थाने की सेसई चौकी के पूर्व प्रभारी एएसआई रामजी सिंह राजपूत को बहाल कर दिया गया है। हालांकि, उन्हें डिमोशन देकर एएसआई से आरक्षक बना दिया गया है। दरअसल, चौकी प्रभारी रहते हुए रामजी सिंह ने मर्ग ड्राफ्ट में लापरवाही की थी। इसे छिपाने के लिए उन्होंने एएसपी के फर्जी हस्ताक्षर कर दस्तावेज एफएसएल भेज दिए। संदेह होने पर मामला उजागर हुआ। विभागीय जांच के बाद सेवा समाप्त की गई थी। अपील पर आईजी हिमानी खन्ना ने बहाली के आदेश दिए, लेकिन अगले दो साल तक उन्हें आरक्षक के पद पर ही ड्यूटी करनी होगी। आरक्षक के पद पर बहाली
मैं अभी अवकाश पर हूं, लेकिन जानकारी मिली है कि फर्जी हस्ताक्षर मामले में बर्खास्त हुए एएसआई रामजी सिंह राजपूत को डिमोशन देकर आरक्षक के रूप में बहाल किया गया है।’
– डॉ. संजीव उईके, एडिशनल एसपी


