सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने एक बार फिर से RSS और BJP पर निशाना साधा है। कहा- वंदे मातरम् का RSS और BJP से क्या तालुक? ये लोग तब कहां थे, जब हिंदुस्तान के क्रांतिकारी चीखते-चिल्लाते थे। उन पर गोलियां पड़ती थीं…उनको पीटा जाता था, तब ये पीटने वालों के साथ थे। इनका राष्ट्रीय आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं। उन्होंने कहा-ये अंग्रेजों के गुलाम थे…गद्दार थे। अब विस्तार से पढ़िए…
वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर पिछले दिनों संसद में चर्चा हुई। इस दौरान सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने राज्यसभा में पिछले दिनों RSS और BJP पर जमकर निशाना साधा। संसद की कार्यवाही से आगरा से लौटे सपा सांसद रामजीलाल सुमन से दैनिक भास्कर ने इस पर बातचीत की। वे अपने बयान पर कायम है। बोले-किस मकसद से वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर चर्चा कराई गई, ये मरी समझ के परे है। कांग्रेस के अधिवेशनों में गाया जाता था वंदे मातरम
दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए सपा सांसद ने कहा-जहां तक वंदे मातरम् का सवाल है तो ये राष्ट्रीय गीत है। इसे संविधान सभा ने स्वीकार किया था। कांग्रेस के अधिवेशनों में ये गीत गाया जाता था। ऐसे में वंदे मातरम का RSS और BJP से क्या तालुक है। कहां थे ये लोग, जब हिंदुस्तान के क्रांतिकारी चीखते-चिल्लाते थे? क्रांतिकारी जब भारत माता की जय-वंदेमातरम बोलते थे, उन पर गोलियां पड़ती थीं, उनको पीटा जाता था…तब ये पीटने वालों के साथ थे। तब कहां थी इनकी देशभक्ति…कहां था इनका राष्ट्रवाद? ये अंग्रेजों के गुलाम थे…गद्दार थे। इनका राष्ट्रीय आंदोलन से कोई संबंध नहीं है। जानबूझ कर ये लोगों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। मेरी ये समझ से परे है कि कहां से ये भावना पैदा हो गई कि वंदे मातरम् से RSS और BJP का भी कोई रिश्ता है। किस मकसद से संसद में वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर चर्चा कराई गई? सपा सांसद ने कहा-राष्ट्रीय आंदोलन से जिनका संबंध है, उनका संबंध वंदेमातरम से है। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि हिंदुस्तान के राष्ट्रीय आंदोलन में जो लोग थे, वो देश को समर्पित थे। अब इस देश में फैसला हो जाना चाहिए कि गांधी का रास्ता ठीक था या नेहरू का रास्ता? लोहिया रास्ता ठीक था या जयप्रकाश का? गोलवलकर रास्ता ठीक था या सावरकर का? पढ़िए रामजीलाल सुमन ने राणा सांगा को क्या कहा था सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने 21 मार्च को राज्यसभा में कहा था- भाजपा वालों का तकिया कलाम हो गया कि मुसलमानों में बाबर का DNA है। फिर हिंदुओं में किसका DNA है? बाबर को कौन लाया? बाबर को भारत में इब्राहीम लोदी को हराने के लिए राणा सांगा लाया था। मुसलमान बाबर की औलाद हैं तो तुम (हिंदू) गद्दार राणा सांगा की औलाद हो। यह हिंदुस्तान में तय हो जाना चाहिए। बाबर की आलोचना करते हैं, राणा सांगा की नहीं। देश की आजादी की लड़ाई में इन्होंने अंग्रेजों की गुलामी की थी। हिंदुस्तान का मुसलमान बाबर को अपना आदर्श नहीं मानता है। वो मोहम्मद साहब और सूफी परंपरा को आदर्श मानता है। ——————— ये खबर भी पढ़ें…. सपा सांसद बोले- काहे का माफीनामा, मैंने सच कहा है:ये ऐतिहासिक तथ्य, बाबर को भारत लाने वाली बात कोई ठुकरा नहीं सकता
सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने शनिवार को राज्यसभा में कहा- भाजपा वालों का तकिया कलाम हो गया कि मुसलमानों में बाबर का DNA है, तो फिर हिंदुओं में किसका डीएनए है? बाबर को कौन लाया? बाबर को भारत में इब्राहिम लोदी को हराने के लिए राणा सांगा लाया था। मुसलमान बाबर की औलाद हैं तो तुम (हिंदू) गद्दार राणा सांगा की औलाद हो। पढ़ें पूरी खबर…


