सुसाइड केस में SC ने राज्य सरकार से मांगा समय:सागर में आदिवासी युवक ने की थी आत्महत्या, पत्नी ने स्थानीय विधायक पर लगाए थे आरोप

सागर जिले के बहुचर्चित नीलेश आदिवासी सुसाइड केस में बीजेपी नेता गोविंद सिंह राजपूत(मालथौन) की याचिका पर बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट से और वक्त मांगा है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कर 15 मार्च 2026 तक जांच की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की है। यह जांच सुप्रीम कोर्ट के 11 दिसंबर 2025 के आदेश के तहत गठित SIT कर रही है। यह मामला सागर जिले के मालथौन का है। जहां पिछले साल नीलेश आदिवासी नामक युवक ने आत्महत्या कर ली थी। पीड़ित की पत्नी रेवा आदिवासी ने यह आरोप लगाए थे कि स्थानीय विधायक भूपेन्द्र सिंह के दबाव के कारण उसके पति ने आत्महत्या की है। इस मामले से जुड़े तीन मामलों जिनमें एक असामान्य मृत्यु (मर्ग) और दो आपराधिक प्रकरण शामिल हैं। इनमें SC/ST एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं भी लगी हैं। शुरुआत में बताया गया था सुसाइड सागर जिले के मालथौन थाना क्षेत्र में नीलेश आदिवासी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई। प्रारंभिक तौर पर इसे आत्महत्या बताया गया, लेकिन परिवार ने आरोप लगाए कि नीलेश को लगातार मानसिक प्रताड़ना और दबाव में रखा गया था। मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया। पहले मर्ग कायम हुआ, फिर FIR मौत के बाद पुलिस ने मर्ग (असामान्य मृत्यु) कायम कर जांच शुरू की। परिजनों के बयानों के आधार पर बाद में मालथौन थाने में आत्महत्या के लिए उकसाने SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अलग-अलग अपराध दर्ज किए गए। कुल मिलाकर तीन केस दर्ज हुए, जिनमें दो आपराधिक प्रकरण और एक मर्ग शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसंबर 2025 को इस मामले में CBI जांच से इनकार करते हुए Article 142 के तहत राज्य स्तर पर SIT गठित करने के निर्देश दिए थे और एक महीने के भीतर जांच पूरी करने को कहा था ।
कोर्ट के आदेश के अनुपालन में 12 दिसंबर 2025 को SIT का गठन किया गया। एसआईटी में दूसरे राज्य के मूल निवासी डीआईजी रैंक के अधिकारी को एसआईटी चीफ बनाने के साथ ही एमपी के बाहर के एक आईपीएस और एक महिला डीएसपी को शामिल करने के आदेश दिए थे। इस टीम को सभी संबंधित FIR और रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर जांच करने के निर्देश दिए गए थे राज्य सरकार ने समय क्यों मांगा राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर आवेदन में कहा गया है कि SIT ने तीनों मामलों में रिकॉर्ड की स्वतंत्र और गहन जांच की है। एक केस (क्राइम नंबर 249/2025) की जांच लगभग पूरी हो चुकी है और फाइनल रिपोर्ट तैयार की जा रही है कई मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए हैं। ये डिवाइस साइबर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। फॉरेंसिक रिपोर्ट के बिना जांच को अंतिम रूप देना संभव नहीं है। सरकार ने कोर्ट को बताया कि देरी न तो जानबूझकर है और न ही लापरवाही के कारण, बल्कि जांच की प्रकृति और तकनीकी साक्ष्यों की वजह से हुई है गोविंद सिंह राजपूत को अब भी गिरफ्तारी से राहत सुप्रीम कोर्ट के 11 दिसंबर 2025 के आदेश के तहत गोविंद सिंह राजपूत की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक है। उन्हें जमानत बांड भरने के निर्देश हैं। यदि SIT को गंभीर आपराधिक साक्ष्य मिलते हैं, तो वह कस्टोडियल पूछताछ के लिए कोर्ट से अनुमति मांग सकती है गवाहों की सुरक्षा पर भी कोर्ट सख्त सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में मृतक की पत्नी रेवा आदिवासी सहित सभी कमजोर गवाहों को प्रभावित न किए जाने के निर्देश मृतक के भाई नीरज आदिवासी और उनके परिवार के खिलाफ कोई coercive action न लेने का आदेश दिया था अब आगे क्या अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि SIT को 15 मार्च 2026 तक का अतिरिक्त समय दिया जाए या नहीं और क्या जांच की प्रगति संतोषजनक मानी जाए। यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि इसमें SC/ST एक्ट, राजनीतिक नाम और मौत से जुड़ी परिस्थितियां शामिल हैं। ये खबर भी पढ़ें… आदिवासी सुसाइड केस…पूर्व गृहमंत्री की भूमिका की जांच होगी सागर के बहुचर्चित निलेश आदिवासी सुसाइड मामले में पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह की भूमिका की जांच होगी। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाना को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) बनाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि मामले की परिस्थितियां ‘निष्पक्ष और स्वतंत्र’ जांच की मांग करती हैं और स्थानीय पुलिस से ऐसी जांच की अपेक्षा नहीं की जा सकती। यहां पढ़ें पूरी खबर…

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *