कोंडागांव में जंगलों की रक्षा के लिए युवाओं ने एक अनूठी पहल की है। वे गार्डलिंग से क्षतिग्रस्त पेड़ों को नया जीवन दे रहे हैं। लकड़ी तस्करों द्वारा पेड़ों की छाल काटने से उनका पोषण मार्ग बाधित हो गया था। इससे पेड़ धीरे-धीरे सूखने लगे थे। युवाओं ने इन पेड़ों के उपचार के लिए नवीन तरीके अपनाए हैं। वे क्षतिग्रस्त हिस्सों पर गोबर और मिट्टी का लेप लगाकर बोरों से बांध रहे हैं। गर्मी में पेड़ों को नमी बनाए रखने के लिए बोतलों से ड्रीप सिस्टम लगाया गया है। इससे पेड़ों को बूंद-बूंद पानी मिल रहा है। पानी में दवाएं भी मिलाई जा रही हैं ताकि पेड़ जल्दी स्वस्थ हो सकें। पेड़ अब हरे-भरे हो रहे इस अभियान में सरपंच प्रकाश चूरगिया, पंच गणेश मानिकपुरी, सोहन कश्यप, गौतम यादव, मंगेश्वर और निलधर समेत कई युवा शामिल हैं। उनके प्रयास सफल हो रहे हैं। सूखने की कगार पर पहुंचे कई पेड़ अब हरे-भरे हो रहे हैं। युवाओं ने उठाई जंगलों को बचाने की जिम्मेदारी जिले में 70 हजार लोगों को जंगल की जमीन के पट्टे मिले हैं। इसी के चलते कई स्थानों पर हरे पेड़ों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया जा रहा है। वन विभाग की टीमें अब तक केवल निगरानी तक सीमित रही हैं। लेकिन युवाओं ने बिना किसी सरकारी सहायता के जंगलों को बचाने की जिम्मेदारी उठाई है। रेंजर प्रतीक वर्मा ने युवाओं के इस प्रयास की सराहना की है।


