छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में लगातार हो रही बारिश से पुलिया बह गया है। प्रतापपुर ब्लॉक के मदनगर गांव में बलरामपुर को जोड़ने वाले इस मार्ग पर आवाजाही बाधित है। ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर पुल के बचे हुए एक हिस्से से साइकिल और बाइक से आना-जाना कर रहे हैं। बस से यात्रा करने वाले ग्रामीणों को अब 5 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने एक महीने पहले ही सीईओ को पुलिया की खराब स्थिति के बारे में सूचित किया था, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। देखिए ये तस्वीरें- छत्तीसगढ़ में पिछले 48 घंटों में बस्तर और रायपुर संभाग के कुछ स्थानों को छोड़ दें तो बाकी जगहों पर ज्यादा बारिश हुई नहीं है। इस बीच मौसम विभाग ने कबीरधाम, राजनांदगांव, बालोद, दुर्ग, बेमेतरा, धमतरी, रायपुर, बलौदाबाजार, महासमुंद और गरियाबंद इन 10 जिलों में बिजली गिरने का यलो अलर्ट जारी किया है। 28 जुलाई तक 603 MM औसत बारिश प्रदेश में हुई थी। 29 जुलाई को 611.5 MM और 30 जुलाई को 623 MM बारिश ही हुई। यानी 28 और 29 जुलाई के बीच 8.5 MM, 29 और 30 जुलाई के बीच 11.5 MM, 28 और 30 जुलाई के बीच सिर्फ 20 MM बारिश ही दर्ज की गई। हालांकि अगले एक से दो दिन के बाद मौसम फिर से बदलने की संभावना है। इसके बाद फिर से पूरे प्रदेश में कई जगहों पर भारी बारिश का अनुमान है। जुलाई में 453 मिलीमीटर बारिश इस महीने की बात करें तो अब तक 453 मिमी बारिश हो चुकी है। आखिरी 6 दिनों यानी 25 जुलाई से 29 जुलाई तक 153 मिमी बारिश हुई है। पिछले दस सालों में सिर्फ दो बार ही जुलाई में बारिश का आंकड़ा 400MM पार हुआ है। 2023 में जुलाई माह में प्रदेश में सबसे ज्यादा 566.8MM पानी बरसा था। इससे पहले 2016 में 463.3MM पानी गिरा था। इस लिहाज से 10 साल में दूसरी बार ही प्रदेश में इतनी बारिश रिकॉर्ड की गई है। रायपुर की बात करें तो प्रदेश में इस महीने अब तक 436 MM पानी बरस चुका है। जून से अब तक 623,1 मिमी पानी बरसा छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 623.1 मिमी औसत बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है। बलरामपुर जिले में सबसे ज्यादा 942 मिमी पानी गिरा है। बेमेतरा में सबसे कम 315 मिमी बारिश हुई है। लंबा रह सकता है मानसून मानसून के केरल पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून है। इस साल 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया था। मानसून के लौटने की सामान्य तारीख 15 अक्टूबर है। अगर इस साल अपने नियमित समय पर ही लौटता है तो मानसून की अवधि 145 दिन रहेगी। इस बीच मानसून ब्रेक की स्थिति ना हो तो जल्दी आने का फायदा मिलता सकता है। जानिए इसलिए गिरती है बिजली दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी आकाशीय बिजली से जुड़े मिथ


