सूर्य मित्र योजना:24 करोड़ रुपए खर्च, 2 साल से तो रोजगार भी नहीं मिला, सेंटरों पर ताला

सौर ऊर्जा के पूर्ण उपयोग और युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के लिए 2015 में केंद्र ने सोलर प्लांट्स स्थापना और संचालन का प्रशिक्षण देने के लिए सूर्य मित्र योजना शुरू की थी। 9 साल बाद भी स्थायी रोजगार के अभाव और ट्रेनिंग सेंटरों की विफलता ने इस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भास्कर ने सोलर ऊर्जा के लिए सबसे बड़े केंद्र बाड़मेर और जोधपुर के 3 ट्रेनिंग सेंटरों की पड़ताल की। बाड़मेर व शिव में 50 सोलर प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। ट्रेनिंग सेंटर धोरीमन्ना में है। जोधपुर में बने दोनों सेंटरों पर ताले लगे मिले। राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान की वेबसाइट के अनुसार, एक छात्र पर 600 घंटे की ट्रेनिंग के लिए 57,000 रुपए का बजट था। प्रदेश में 15 ट्रेनिंग सेंटर हैं। 2022 में 438, 2023 में 420 को ट्रेनिंग दी, लेकिन उन्हें रोजगार नहीं मिला। साल 2015 से 2023 के बीच राज्य में 4,331 युवाओं को प्रशिक्षित किया लेकिन 2,281 को ही अस्थायी रोजगार मिल सका। जबकि 4331 युवाओं के प्रशिक्षण पर 24.68 करोड़ खर्च हो चुके हैं। राष्ट्रीय स्तर पर 57,731 प्रशिक्षित युवाओं में से 26,967 को ही रोजगार मिला है। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक केंद्रों पर 30 छात्रों के लिए 3 महीने में 600 घंटे के कोर्स चलाने के लिए 8.8 लाख रुपए देता है। साथ ही रहने और खाने की सुविधा के लिए 8.5 लाख रुपए अलग से देते हैं। ये कोर्स मुफ्त हैं। ट्रेनिंग के बाद, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के अंतर्गत आने वाले ग्रीन जॉब्स के लिए कौशल परिषद का प्रमाण-पत्र दिया जाता है। क्यों युवा दूर हो रहे?…
1. युवाओं को रोजगार का स्थायी समाधान नहीं मिल पाया।
2. ट्रेनिंग के बाद वेतन 15,000-17,000 रुपए ही मिलता है।
3. युवाओं को केवल निजी कंपनियों में अस्थायी जॉब मिलता है।
4. दावा हाई-क्वालिफाइड का, सेंटर में बीटेक ग्रेजुएट्स ट्रेनिंग देते हैं। बीटेक से दिलवा रहे ट्रेनिंग, लाइसेंस तक एक्सपायर
बाड़मेर के धोरीमन्ना में उत्कृष्ट कॉलेज का लाइसेंस खत्म है। 2021-22 से अब तक 60 को ट्रेनिंग मिली है। 2023-24 व 2024-25 का बैच स्टार्ट नहीं हुआ है। सरकार का दावा था हाई क्वा​लिफाइड ट्रेनर्स से ट्रेनिंग कराई जाएगी, यहां बीटेक पढ़े युवाओं द्वारा ही ट्रेनिंग करवाई जा रही हैं। जहां ट्रेनिंग सेंटर बता रखा, वहां 2021 से ताला
राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान की वेबसाइट पर जोधपुर के फूल बाग में प्लॉट नंबर 1 में राजस्थान आईटीआई का एड्रेस है। 2021 से ट्रेनिंग बंद है। जगह खंडहर हो चुकी। पड़ोसियों ने बताया कि सालों से यहां ताला है। भास्कर ने संचालक कैलाश परिहार से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि संस्थान बंद हो चुका है। दावा-90 युवाओं को ट्रेनिंग दी, लेकिन लिस्ट नहीं जोधपुर में आईटीआई संचालित हैं, मगर 2022 से ट्रेनिंग बंद है। संचालन करने वाले विकास चौधरी बताते हैं कि यहां 90 युवाओं को ट्रेनिंग दी। सरकार की तरफ से प्रति घंटे 15 से 20 रुपए मिलते हैं। ऐसे में युवाओं का रहना, खाना, ट्रेनिंग आदि सब महंगा है। जॉब भी प्राइवेट ही मिलती है। ट्रेनिंग लेने वाले 90 युवा कौन थे, इसकी वे लिस्ट नहीं दे सके।

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