एजुकेशन रिपोर्टर | भिलाई ड्रोन फोटो या हवाई छायाचित्र सीधा फोटोग्राफ होता है। वहीं पृथ्वी की सतह पर उपस्थित विभिन्न ऑब्जेक्ट से सूर्य के परावर्तित प्रकाश के आधार पर इमेजरी फोटो यानी सेटेलाइट फोटो तैयार की जाती है। ड्रोन फोटो और सेटेलाइट फोटो में यह मुख्य अंतर है। यह बातें साइंस कॉलेज के भूगोल और भू-विज्ञान विभाग की ओर से हुई रिमोट सेंसिंग और जीआईएस पर शुरू हुई सात दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए छत्तीसगढ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रशांत कविश्वर ने कही। उन्होंने इसके सैद्धांतिक और प्रायोगिक दोनों प्रकार के प्रशिक्षण की जानकारी दी। सत्र के बाद विद्यार्थियों ने सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासाएं शांत की। इससे पहले संस्था के प्राचार्य डॉ. अजय सिंह ने कार्यशाला को अत्यंत उपयोगी बताया। इससे एमए भूगोल और एमएससी जियोलॉजी के विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम को समझने में मदद मिलेगी। इससे पहले भू-विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव ने कार्यशाला का महत्व और उसमें विचार के लिए रखे जाने वाले बिंदुओं की जानकारी दी। कार्यक्रम को भूगोल विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार मिश्रा ने संबोधित किया। इस अवसर पर सहायक प्राध्यापक प्रशांत दुबे, अतिथि प्राध्यापक डॉ. विकास स्वर्णकार, इंद्रजीत साकेत आदि उपस्थित थे।


