कटनी जिले के बड़वारा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम गुड़ा, जमुनिया और कोको डबरा के सैकड़ों आदिवासियों ने शासकीय भूमि के आवंटन की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट का घेराव किया। राष्ट्रीय दलित आदिवासी महासभा के बैनर तले पहुंचे ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि उनके पास आजीविका का कोई स्थायी साधन नहीं है। आदिवासियों ने मांग की कि रिक्त सरकारी भूमि पर उन्हें मालिकाना हक दिया जाए, ताकि वे खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें। सैकड़ों आदिवासी पहुंचे कलेक्ट्रेट सोमवार को बड़ी संख्या में आदिवासी पुरुष और महिलाएं कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। हाथों में ज्ञापन और नारेबाजी करते हुए उन्होंने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन आदिवासियों में अपनी जमीन को लेकर गहरी नाराजगी देखने को मिली। आजीविका का नहीं कोई ठोस साधन प्रदर्शन कर रहे आदिवासी परिवारों का कहना है कि उनके पास न तो पर्याप्त खेती की जमीन है और न ही कोई स्थायी रोजगार। जमीन के अभाव में वे मजदूरी पर निर्भर हैं, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर भी वे चिंतित हैं। प्रत्येक परिवार को 5 एकड़ पट्टे की मांग आदिवासियों ने मांग की कि गांव में उपलब्ध रिक्त शासकीय भूमि में से प्रत्येक पात्र आदिवासी परिवार को 5-5 एकड़ का सरकारी पट्टा दिया जाए। उनका कहना है कि यदि उन्हें खेती योग्य जमीन मिल जाए तो वे आत्मनिर्भर बन सकते हैं और शासन की योजनाओं का सही लाभ उठा सकते हैं। महासभा के नेतृत्व में हुआ प्रदर्शन यह पूरा प्रदर्शन राष्ट्रीय दलित आदिवासी महासभा के बैनर तले किया गया। संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौके पर मौजूद रहे और प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय महासचिव छोटू कोल ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करता आया है, लेकिन आज उन्हीं आदिवासियों को अतिक्रमण के नाम पर उनकी जमीनों से बेदखल किया जा रहा है। संवैधानिक अधिकारों के हनन का आरोप छोटू कोल ने कहा कि जमीन से वंचित करना आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने मांग की कि प्रशासन जल्द से जल्द सर्वे कराकर पात्र आदिवासी परिवारों की सूची तैयार करे और उन्हें भूमि का आवंटन करे। प्रशासन को दी आंदोलन की चेतावनी महासभा ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर समय रहते गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आने वाले दिनों में प्रदर्शन का दायरा बढ़ाया जाएगा। आदिवासियों ने कहा कि वे अपने हक के लिए चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करेंगे। गांव स्तर से लेकर जिला स्तर तक आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और उम्मीद जताई कि प्रशासन उनकी समस्याओं को समझेगा और जल्द कोई ठोस निर्णय लेगा।


