भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध के हालात हैं। देश की सीमा पर तैनात रायपुर के जवान हितेश साहू भारतीय सेना के अंदाज में दुश्मन देश को मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं। मदर्स डे पर दैनिक भास्कर ने इस जवान की मां से बातचीत की। पाकिस्तान की वजह से देश के बॉर्डर इलाकों में जो हालात हैं, उस पर एक सैनिक की मां क्या सोचती है ? पाकिस्तान को लेकर एक सैनिक की मां के अंदर क्या भाव है ? यह सुमित्रा साहू ने बताया। उन्हीं के शब्दों में पढ़िए पूरा इंटरव्यू। सवाल- बेटा फौज में है, आपको चिंता होती होगी ? जवाब- मुझे चिंता नहीं गर्व है कि, मेरा बेटा भारतीय सेना में है। इस समय वो देश की सीमा पर तैनात है। उससे बात हुई थी, वो कह रहा था कि मां आपने मुझे जिस काम के लिए भेजा है, उस काम पर हूं। तुम चिंता मत करना, मैंने भी उससे यही कहा कि, हमारे लिए और सभी देशवासियों के लिए सेना हमारा प्राउड है। सवाल- तनाव के हालात हैं बॉर्डर पर, बात हुई थी बेटे से आपकी ? जवाब- नहीं इस समय तो बात नहीं हो पा रही है। अखबार और न्यूज चैनल से हमें बॉर्डर पर क्या हो रहा है, इसकी जानकारी मिलती है। मैंने बेटे से कहा है कि, वो अपना ध्यान रखे बस। सवाल- पाकिस्तान को लेकर क्या होना चाहिए, भारत की ओर से ? जवाब- अगर कोई हमारे देश को छेड़ेगा तो हम उसे नहीं छोड़ेंगे। पाकिस्तान ने पहलगाम में बेगुनाह टूरिस्ट को मारा, उसका उत्तर तो देना बनता है। हम शांत बैठकर यह सब नहीं देख सकते। हमारा देश किसी दूसरे देश को नुकसान नहीं पहुंचा रहा है। प्रधानमंत्री और सेना की ओर से कहा गया है कि, आतंकवाद को खत्म कर रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान ने तो हमारे सैन्य क्षेत्रों पर हमला किया है, तो हमारे देश के जवान और आर्मी कोई साधारण चीज नहीं है। हम चुप नहीं रहेंगे। हर हमले का मुंहतोड़ तरीके से जवाब देंगे। ऑपरेशन सिंदूर में यही हुआ और पाकिस्तान को सबक सिखाया गया। मुझे अपने देश की सेवा पर गर्व है। हर मां को इस बात पर गर्व है जिनके बेटे-बेटियां फौज में हैं। सवाल- बेटे ने कैसे तैयारी की फौज में जाने की ? जवाब- उसे हमेशा से ही सबसे कुछ अलग करने की चाहत थी। उसे हमेशा से ही आर्मी में जाने की इच्छा थी। वो इसके पीछे बहुत मेहनत कर रहा था। भारतीय नौसेना के लिए भी उसने तैयारी की मगर उसकी तबीयत ठीक ना होने की वजह से तब सिलेक्शन नहीं हो पाया था। उसने हार नहीं मानी और हमने भी उसका हौसला बढ़ाया। अग्निवीर स्कीम के तहत जब भर्ती निकली तो उसने पूरी मेहनत की और सिलेक्ट हो गया। सवाल- इस इंटरव्यू के जरिए बेटे को या आर्मी को क्या संदेश देंगी ? जवाब- कई दिनों से बेटे से बात नहीं होने की वजह से मां की आंखों में आंसू आ गए। सुमित्रा ने भरे गले से आंखों में ही आंसुओं को रोकते हुए कहा कि, बेटे से और बाकी सैनिकों से यही कहना चाहूंगी कि ‘वेलडन’… ऑपरेशन सिंदूर के तहत सेना ने जो काम किया है, ऐसा लगता है कारगिल, पुलवामा जैसी घटनाओं को अंजाम देने वालों को सबक सिखाया गया है। पिता को बेटे पर गर्व है हितेश के पिता जितेंद्र साहू ने कहा कि, हमें गर्व है कि बेटा इस समय सीमा पर तैनात है। छोटी सी उम्र में वो यह काम कर रहा है। पाकिस्तान समेत सभी दुश्मन देशों को भारत सबक सिखाए। देश के लिए शहीद हुए सैनिकों और आम नागरिकों को यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। जवाब ऐसा हो कि बार-बार पाकिस्तान उठकर न आ सके, जय हिंद। ………………………………….. इससे संबंधित यह खबर भी पढ़िए… कैंसर से जंग जीती…जुड़वां बेटियों को गोद लेकर बनी मां: शिक्षिका बोलीं-मां बनने शादी जरूरी नहीं; इनकी प्रेरणा से 10 घरों में गूंजी किलकारी “मैंने मौत को करीब से देखा है, लेकिन हार नहीं मानी। दिल में मां बनने की ख्वाहिश जिंदा थी। मेरी कहानी में आंसू हैं, उम्मीद, दर्द और ढांढस भी है। जिंदगी ने जब दूसरी बार मौका दिया, तो उसे सिर्फ जिया नहीं, बल्कि संवारा। बिना शादी किए जुड़वां बेटियों को गोद लिया। आज आंगन में किलकारियां गूंज रही हैं।” पढ़ें पूरी खबर…


