जिले के विभिन्न छात्रावासों में कार्यरत संविदा कर्मचारी लंबे समय से वेतन भुगतान न होने से परेशान हैं। इसी मुद्दे को लेकर कर्मचारियों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए अपनी आर्थिक परेशानियों से अवगत कराया। कर्मचारियों का कहना है कि समय पर वेतन न मिलने के कारण उनका रोजमर्रा का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ज्ञापन में कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें नियमित मासिक वेतन नहीं मिल रहा है। स्थिति यह है कि तीन से चार माह में एक बार ही भुगतान हो पाता है। इस अनियमितता के चलते परिवार का पालन-पोषण, घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतें पूरी करना बेहद मुश्किल हो गया है। परिवार की पूरी जिम्मेदारी इसी आय पर संविदा कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि उनके पास आय का कोई अन्य साधन नहीं है। पूरा परिवार इसी मानदेय पर निर्भर है। ऐसे में वेतन में देरी सीधे तौर पर उनके जीवन स्तर और मानसिक स्थिति को प्रभावित कर रही है। महंगाई के सामने कम पड़ रहा मानदेय कर्मचारियों ने यह भी बताया कि वर्तमान में दिया जा रहा मानदेय बेहद कम है और बढ़ती महंगाई के अनुरूप नहीं है। लगातार बढ़ रहे खर्चों के बीच कम आय और अनियमित भुगतान ने उनकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया है। दैनिक मानदेय 500 रुपए करने की मांग ज्ञापन के माध्यम से कर्मचारियों ने मांग की है कि उनका दैनिक मानदेय कम से कम 500 रुपये किया जाए। साथ ही बकाया वेतन का शीघ्र भुगतान कराया जाए और भविष्य में वेतन समय पर देने की ठोस व्यवस्था की जाए। संविदा कर्मचारियों ने उम्मीद जताई कि जिला कलक्टर उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान का आश्वासन देंगे। कर्मचारियों की ओर से यह जानकारी गुरुवार को दोपहर 3 बजे दी गई।


