हाईकोर्ट ने थाने बाहर फोटो लेने पर रोक लगाई:जस्टिस फरजंद अली बोले- “आरोपी भी इंसान हैं, अपराधी नहीं”, 24 घंटे में तस्वीरें हटाने के आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने जैसलमेर जिले के बासनपीर मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की उस कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी की है, जिसमें गिरफ्तार आरोपियों को थाने के बाहर बैठाकर फोटो खींचकर सोशल मीडिया और अखबारों में प्रसारित किया जाता है। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि आरोपी तब तक अपराधी नहीं होता, जब तक अदालत उसे दोषी घोषित न करे। जस्टिस फरजंद अली ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से अपमानित करना, उसकी तस्वीरें शेयर करना और समाज में उसे अपराधी की तरह पेश करना संविधान और गरिमा के अधिकार का खुला उल्लंघन है। कोर्ट ने 24 घंटे में तस्वीरें हटाने और राज्य सरकार से जवाब भी तलब किया है। बासनपीर मामले में लगाई थी रिट बता दे कि यह मामला इस्लाम खान, बाय खान, सुभान खान, राणे खान, बसीर खान, जकर खान, हसियत, तिजा, हुरा और जामा द्वारा दायर आपराधिक रिट याचिका से जुड़ा है। सभी परिवादी जैसलमेर जिले के बासनपीर जुनी क्षेत्र के निवासी हैं। 10 जुलाई को बासनपीर गांव में पुरानी छतरियों के पुनर्निमाण एवं मरम्मत के दौरान बासनपीर के सैकड़ों पुरूष, महिलाएं व बच्चे इकट्ठे होकर खड़े थे और जोर-जोर से चिल्लाते हुए पुरानी छतरियों के निर्माण कार्य को नहीं करने देने का विरोध करने लगे। प्रदर्शन करते हुए पुलिस जाब्ते, प्रशासनिक कर्मचारियों के लोगों पर पत्थरबाजी कर जानलेवा हमला करते हुए घेरकर पत्थरों व लाठियों से मारपीट की थी। पुलिस ने इस मामले में राजकार्य में बाधा का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और कुल 23 लोगों को महिलाओं समेत गिरफ्तार किया था। याचिका में आरोप लगाया गया कि FIR संख्या 75/2025 में कार्रवाई के दौरान पुलिस ने पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं को भी थाने के गेट पर बैठाकर फोटो खींचे और उन्हें सार्वजनिक कर दिया। महिलाओं और अविवाहित युवतियों की तस्वीरें शेयर की याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि जिन लोगों की तस्वीरें शेयर की गईं, उनमें अविवाहित युवतियां और महिलाएं भी शामिल थीं। उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया और स्थानीय समाचार पत्रों में इस तरह प्रकाशित की गईं, जैसे वे सिद्ध अपराधी हों। कोर्ट ने माना कि इस तरह की तस्वीरें एक बार सार्वजनिक हो जाने के बाद जीवनभर पीछा नहीं छोड़तीं और महिलाओं के सामाजिक सम्मान, विवाह और मानसिक स्थिति पर गंभीर असर डालती हैं। कपड़े उतरवाकर फोटो लेने के आरोप भी गंभीर हाईकोर्ट ने इस आरोप को भी अत्यंत गंभीर माना कि कुछ मामलों में पुलिस ने आरोपियों को कपड़े उतरवाकर या केवल अंडर-गारमेंट में बैठाकर फोटो खींची। कोर्ट ने कहा कि यह कृत्य अमानवीय, अपमानजनक और कानून के दायरे से बाहर है। न तो दंड प्रक्रिया संहिता और न ही किसी पुलिस कानून में ऐसी अनुमति दी गई है। खबर पर भी कोर्ट का संज्ञान सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील देवकीनंदन व्यास ने प्रकाशित उस खबर का हवाला दिया, जिसमें जोधपुर में एक वकील को गिरफ्तार कर थाने के बाहर बैठाकर उसकी तस्वीर वायरल की गई थी। हाईकोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि यह एक खतरनाक और गलत परंपरा बनती जा रही है। 24 घंटे में फोटो हटाने के आदेश हाईकोर्ट ने जैसलमेर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए कि बासनपीर प्रकरण सहित गिरफ्तार व्यक्तियों की सभी तस्वीरें तुरंत सोशल मीडिया और वेब पोर्टल से हटाई जाएं। साथ ही जोधपुर में गिरफ्तार एडवोकेट मोहान सिंह रतनू की तस्वीरें भी 24 घंटे में हटाने के आदेश दिए गए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस से जवाब तलब किया है और पूछा है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए क्या ठोस व्यवस्था की गई है। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी। ————— यह खबर भी पढ़े
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