सोने का कड़ा पहनने से होती थी जलन:कोर्ट में बाबू और आरपीएफ में एएसआई के बेटों ने करवाई लूट; बचपन के दोस्त हैं

रतलाम-बाजना रोड स्थित शिवगढ़ की पहाड़ी पर सूर्योदय देखने गए तीन दोस्तों के साथ लूट की वारदात कराने वाले साथ गए दो दोस्त ही निकले। दोनों दोस्तों ने मिलकर अपने 3 अन्य दोस्तों से लूट की घटना करवाई। लूट कराने वाले दोस्तों ने अपने ऊपर भी हमला कराया। लूट करने वालों आरोपी में से एक के पिता कोर्ट में बाबू हैं तो एक के आरपीएफ में एएसआई हैं। जानकारी के अनुसार, रतलाम के शास्त्री नगर में रहने वाला कार्तिकेय राव (17) इंदौर से डिजिटल मार्केटिंग कोर्स कर रहा है। छुट्टियों में वह अपने घर रतलाम आया था। बुधवार सुबह 5.15 बजे वह दोस्त अनीस कुमार (18) निवासी न्यू ग्लोबस कॉलोनी व सेंकल सिंह (18) निवासी रेलवे कॉलोनी के साथ एक्टिवा से शिवगढ़ के पास भाई-बहन पहाड़ी पर सूर्योदय देखने गया था। इसी समय मुंह पर कपड़ा बांधे तीन युवक उनके पास पहुंचे। इन तीनों को पकड़ लिया। मारपीट की। कार्तिकेय के गले पर एक युवक ने चाकू रख मोबाइल के कवर में रखे 5 हजार रुपए, 17 ग्राम सोने का कड़ा, 6 ग्राम सोने की अंगूठी, चांदी का लॉकेट छीन लिया। अनीस से एक हजार और सेंकल से चांदी की 10 ग्राम की चेन और 2 हजार रुपए के साथ के साथ तीनों के मोबाइल छीन कर भाग गए। शिवगढ़ पुलिस को शिकायत की। पुलिस जांच में जुटी। घटना का रिक्रिएशन किया
पुलिस को बताए गए घटनाक्रम के बाद पुलिस तीनों दोस्तों को लेकर उसी पहाड़ी पर पहुंची। घटना का रिक्रिएशन किया। तीनों दोस्तों को अलग-अलग दूर कर घटनाक्रम की जानकारी ली। पुलिस को साथ गए दोस्तों पर शंका हुई। दोस्तों को अलग-अलग कर सख्ती से पूछताछ की तो पता चल गया कि साथ गए दोनों दोस्तों ने ही अपने बचपन के दोस्त के साथ लूट करवाई। सोने का कड़ा पहनने और हमेशा रुपए रखने से थी जलन
एसपी अमित कुमार ने बताया शंका के आधार पर कार्तिकेय को साथ लेकर गए दोस्त सेंकल व अनिस से जब कड़ी पूछताछ की तो वह दोनों टूट गए। दोस्तों ने कबूला कि कार्तिकय हमेशा सोने का कड़ा, अंगूठी पहनता था। जेब में अपने पास रुपए भी रखता था। हमें जलन होती थी। इसलिए हमने अपने चार अन्य दोस्तों के साथ लूट की योजना बनाई। इसीलिए कार्तिकेय को सूर्योदय दिखाने के बहाने शिवगढ़ की पहाड़ी पर ले गए। जहां पहले से मुंह पर कपड़ा बांधे सेंकल के तीन दोस्त खड़े थे। कार्तिकेय को ऐसा कुछ ना लगे इसलिए दोस्तों ने खुद के साथ भी लूट करवाई। चार दोस्तों के साथ प्लानिंग कर लूट की घटना को अंजाम दिया है। 6 दोस्तों में एक नाबालिग भी शामिल
शिवगढ़ थाना प्रभारी अर्जुन सेमलिया ने बताया लूट में शामिल आरोपी दोस्त सेंकल (18) पिता संतराम निवासी ओल्ड रेलवे कॉलोनी, अनिस (18) पिता अनिल कुमार न्यू ग्लोबल सिटी, प्रांजल (18) पिता दिपक कौशल रेल नगर, कुणाल (18) पिता प्रज्जवल पांडे ओल्ड रेलवे कॉलोनी, यश (19) पिता दीपक पंडित निवासी रेल नगर एवं एक नाबालिग (17) को गिरफ्तार कर लिया है। नाबालिग को बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया है। जबकि पांच आरोपियों को जेल भेज दिया है। 6 आरोपियों में से आरोपी कृणाल घटना के समय साथ नहीं था। लेकिन लूट की प्लानिंग में शामिल था। वह घटना के बाद से सेंकल के संपर्क में था। हर बात की अपडेट ले रहा था। यहां तक कार्तिकेय के साथ शिवगढ़ थाने व घर पर भी साथ में रहा। 11वीं तक सेंट्रल स्कूल में की पढ़ाई
कार्तिकेय ने बताया उसने सेंट्रल स्कूल में फर्स्ट क्लास से पढ़ाई की। सेंकल भी फर्स्ट क्लास से उसके साथ था। जबकि अनिस 6ठी कक्षा से साथ में था। 11वीं में सेंकल व अनिस फैल हो गए थे। तब वह स्कूल से निकल गए। अनिस को उसके घरवालों ने हरियाणा भेज दिया था। जबकि सेंकल गांधी नगर के एक प्राइवेट स्कूल में एडमिशन ले लिया था। बाद में सेंकल की पहचान कुणाल से एक कोचिंग सेंटर पर हुई। सेंकल व अनिस के चेहरे पर डर नहीं था
कार्तिकेय ने बताया घटना के बाद से मैं बहुत डर गया था। लेकिन सेंकल व अनिस के चेहरे पर ऐसा कुछ नहीं लग रहा था। घटना के बाद सबसे पहले सेंकल के मोबाइल पर कुणाल का ही फोन आया। यहां तक सेंकल रास्ते में किसी को पेमेंट देने भी रुका। उसे कहां अपने साथ लूट हुई लेकिन वह उसे ज्यादा सीरियस नहीं ले रहा था। यहां तक जब रतलाम आए तो कुणाल भी घर से लेकर थाने तक साथ में रहा। सरकारी नौकरी में दो आरोपी के पिता
थाना प्रभारी सेमलिया के अनुसार आरोपी सेंकल के पिता कोर्ट में बाबू हैं। अनिस के पिता आरपीएफ में एएसआई हैं। प्रांजल के पिता फैक्ट्री में काम करते हैं। कुणाल के पिता रेलवे में हैं। यश के पिता फैक्ट्री में काम करते हैं। 20 हजार रुपए में करवाई लूट
लूट के बाद सेंकल, अनिस व कुणाल लूटी हुई चीजों व रुपयों को आपस में बांटने वाले थे। जिनसे लूट कराई उनसे 20 हजार रुपए देने का सौदा तय किया था। पूरे मामले में पुलिस को तब शक हुआ जब लूट के बाद मोबाइल कुछ ही दूरी पर पहाड़ी पर मिल गए। मोबाइल पर किसी प्रकार का कोई स्क्रैच नहीं था। मोबाइल आसानी से नीचे रखे हुए थे। अगर फेक कर जाते तो वह टूट सकते थे या उन पर स्क्रैच आते। जब उनसे पूछा गया कि वह लुटेरे किस तरह बात कर रहे थे तो कहा कि हिंदी भाषा में बात कर रहे थे। जबकि पहले आदिवासी टाइप बताया था। इससे पुलिस का शक दोस्तों पर गहरा गया।

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