कोल लेवी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को फिर कार्रवाई की। एजेंसी के अफसरों ने पूर्व मुख्यमंत्री की उपसचिव रहीं सौम्या चौरसिया और निखिल चंद्राकर से जुड़ी 2.66 करोड़ रुपए की आठ संपत्तियों को अटैच किया है। ईडी का दावा है कि दोनों ने ये संपत्तियां भ्रष्टाचार से अर्जित धन से खरीदीं या उनमें निवेश किया। इस मामले में अब तक ईडी 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि 35 व्यक्तियों और कंपनियों को आरोपी बनाया गया है। इनसे संबंधित करीब 273 करोड़ रुपए की संपत्तियां अब तक अटैच किया जा चुका है। ईडी के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री की उपसचिव और निलंबित राज्य प्रशासनिक सेवा (राप्रसे) अधिकारी सौम्या चौरसिया पिछली सरकार के सबसे प्रभावशाली अधिकारियों में शामिल थीं और सिंडिकेट की प्रमुख सदस्य थीं। यह सिंडिकेट कोयला परिवहन में प्रति टन 25 रुपए कमीशन वसूलता था। तीन वर्षों में करीब 540 करोड़ रुपए का कमीशन वसूला गया। यह लेवी नीचे से ऊपर तक पहुंचाई जाती थी। रायपुर में यह रकम सूर्यकांत तिवारी के करीबी निखिल चंद्राकर के पास जमा होती थी, जिसे वह सूर्यकांत तिवारी के बताए स्थानों तक पहुंचाता था। तिवारी के भाई से जब्त डायरी में कोडवर्ड में पूरे लेन-देन का उल्लेख मिला है।जांच के दौरान ईडी को बैंक लेन-देन से जुड़ी अहम जानकारियां भी प्राप्त हुई हैं। हालांकि निखिल चंद्राकर को आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने कोल लेवी घोटाले में सरकारी गवाह बनाया है। उसके बयान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत न्यायालय में दर्ज कराए गए हैं, जिसमें उसने सभी आरोपियों के खिलाफ बयान दिया है। विधायक से लेकर आईएएस तक 35 आरोपी कोल लेवी घोटाले में ईडी और ईओडब्ल्यू ने निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू, समीर बिश्नोई, जयप्रकाश मौर्य, विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक चंद्रदेव राय, कांग्रेस नेता आरपी सिंह, विनोद तिवारी, कारोबारी सूर्यकांत तिवारी, सुनील अग्रवाल, राप्रसे अधिकारी सौम्या चौरसिया, माया वॉरियर, खनिज अधिकारी समेत कुल 35 लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें से 11 की गिरफ्तारी हो चुकी है। चर्चा है कि चार्जशीट में नाम आने के बावजूद सरकार ने अब तक जयप्रकाश मौर्य को निलंबित नहीं किया है, बल्कि उनका वेतन भी बढ़ा दिया गया है। वहीं आबकारी घोटाले में अब तक 28 लोगों को सस्पेंड किया जा चुका है।


