इंदौर हाईकोर्ट ने स्कीम नंबर 113 से जुड़े ध्वस्तीकरण के मामले में याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत दी है। दरअसल, नगर निगम जोन-7 के भवन अधिकारी को वार्ड क्रमांक 32 स्थित स्कीम नंबर 113 में अवैध निर्माण को लेकर एक आवेदन प्राप्त हुआ था। इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए भवन अधिकारी ने कुछ निर्माणाधीन भवनों के मालिकों को नोटिस जारी किया। भवन अनुमति, स्वीकृत नक्शे और मौके पर हुए निर्माण की जांच के बाद अधिकारी ने निर्माणाधीन मकानों में नक्शे के विपरीत निर्माण पाए जाने की बात कही। इसके बाद भवन अधिकारी ने उक्त निर्माण को 15 दिनों के भीतर तोड़ने का आदेश पारित कर दिया। इस आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने अधिवक्ता विस्मित पानोत एवं अधिवक्ता प्रणीति शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट, इंदौर में याचिका दायर की। निगम ने याचिका निरस्त करने की मांग की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता विस्मित पानोत ने न्यायालय को बताया कि भवन अधिकारी ने प्राप्त शिकायत पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई करते हुए अपनी मनमर्जी से याचिकाकर्ताओं के मकानों पर कार्रवाई की, जो संविधान के अनुच्छेद 14 का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि निगम अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा ध्वस्तीकरण मामलों में जारी किए गए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया है। इसी आधार पर अंतरिम राहत की मांग की गई। वहीं, नगर निगम की ओर से पेश जवाब में की गई कार्रवाई को उचित ठहराते हुए याचिका को निरस्त किए जाने की मांग की गई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं के प्लॉट पर 6 जनवरी 2026 तक कोई ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं की जाए। साथ ही कोर्ट ने संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया कि वह 6 जनवरी 2026 तक पूरी कार्रवाई से संबंधित विवरण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे।


