चाईबासा| झारखंड के प्राथमिक विद्यालयों के जनजातीय बच्चे बहुभाषी शिक्षा अंतर्गत अपना ज्ञान बढ़ाएंगे। इनके लिए शब्द व वाक्य तथा कहानी व कविताएं हिंदी एवं मातृभाषा में संयुक्त रूप में बन रही हैं। झारखंड के पांच जनजातीय भाषा संताल, मुंडारी, कुड़ूख, खड़िया और हो बच्चों के लिए संबंधित भाषा शिक्षक-शिक्षिकाओं द्वारा विभिन्न रोचक कहानी एवं कविताएं लिखी जा रही हैं। झारखंड शैक्षिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान परिषद रांची द्वारा हो भाषा के बच्चों के लिए कहानी व कविताएं लिखने की जिम्मेदारी शिक्षक कृष्णा देवगम, राजेश सिंकू, हरिश्चंद्र लागुरी, विद्यासागर लागुरी, दमयंती बिरूवा और विनिता कुमारी गोप को दिया गया है। वहीं, उन कहानी व कविताओं से संबंधित चित्र बनाने के लिए मंगल सिंह मुंडा को कहा गया है।


