स्कूल खुलते ही शराबी शिक्षक पहुंचे क्लास:25 दिन में 7 केस, सस्पेंशन के बाद फिर पीते पकड़े गए; नशे में बच्चियों संग डांस किया

“हमारे स्कूल में टीचर रोज शराब पीकर आते हैं…गालियां देते हैं, मारते-पीटते हैं, चिल्लाते हैं…कई बार तो क्लास में ही सो जाते हैं। पापा कहते हैं कि पढ़ो…लेकिन हम कैसे पढ़ें?” ये शब्द हैं बलरामपुर जिले के पशुपति प्राइमरी स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली एक बच्ची के, जिसने कैमरे की ओर देखा, कुछ पल रुका और फिर नजरें चुराकर खामोशी से एक कोने में खड़ी हो गई। उसकी मासूम आंखों में डर था, उलझन थी, और शायद एक सवाल भी-क्या उसके ‘शिक्षक’ वाकई उसके भविष्य के निर्माता हैं? छत्तीसगढ़ के कई स्कूलों में इस वक्त शिक्षा की हालत खराब नहीं, शर्मनाक है। सरकारी स्कूल अब क्लासरूम से ज्यादा, शराबी ड्रामे का मंच बनते जा रहे हैं। कहीं हेडमास्टर छात्राओं के साथ डांस कर रहे हैं, कहीं ‘स्प्राइट’ में रम मिलाकर स्कूल ला रहे हैं और सबसे बड़ी बात- ये कोई नई कहानी नहीं है, ये वही लोग हैं जो पहले भी पकड़े गए, सस्पेंड हुए फिर बहाल होकर वापस पीने लगे। ऐसी ही 7 घटनाएं सिर्फ महीने भर के अंदर हुई हैं। पढ़िए ये पूरी रिपोर्ट:- केस 1: “मुझे सस्पेंड कर दो… आधा वेतन लूंगा और घर बैठूंगा” 10 जुलाई 2025 को धमतरी जिले के मगरलोड ब्लॉक के प्राथमिक शाला छोटी करेली में तैनात एक शिक्षक खुलेआम शराब के नशे में स्कूल पहुंचा और फिर वहां बैठकर खुद को सस्पेंड करने की मांग करने लगा। वायरल वीडियो में वह कहता दिखा- “मुझे सस्पेंड कर दो, मैं सस्पेंड होना चाहता हूं। आधा वेतन मिलेगा तो घर में बैठकर ही नौकरी करूंगा। “कुर्सी पर बैठकर बहकी-बहकी बातें करते शिक्षक का वीडियो स्कूल स्टाफ ने ही बनाया, जो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो सामने आने के बाद शिक्षक को निलंबित कर दिया गया। केस 2: बच्चों के साथ नशे में डांस, हेडमास्टर बना मजाक बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर ब्लॉक के पशुपतिपुर प्राइमरी स्कूल में तैनात हेडमास्टर लक्ष्मीनारायण सिंह अक्सर नशे की हालत में स्कूल आते थे। वीडियो में वे स्कूल के क्लासरूम में मोबाइल पर गाना बजाकर स्कूली छात्राओं के साथ डांस करते दिखे। ये वीडियो भी स्कूल स्टाफ ने ही रिकॉर्ड किया और जब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तब DEO ने कार्रवाई कर उन्हें सस्पेंड कर दिया। स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि हेडमास्टर की ये हरकतें पहले भी कई बार देखी गई थीं, लेकिन कार्रवाई तब हुई जब वीडियो वायरल हुआ। केस 3: “कल मस्त स्कूल खुलेगा” बड़बड़ाते पहुंचे स्कूल एक दिन पहले धमतरी जिले के ही मगरलोड ब्लॉक स्थित नवीन प्राथमिक शाला सोनपरी में एक और मामला सामने आया। यहां प्रभारी हेडमास्टर शराब के नशे में स्कूल पहुंच गए- वो भी एक दिन पहले। वीडियो में शिक्षक जमीन पर लेटे हैं, बड़बड़ाते रहे- “कल मस्त स्कूल खुलेगा, स्कूल में पूरा देवता है। खा-पीकर नहीं आना है।”स्कूल अभी खुला भी नहीं था और शिक्षक पूरी तैयारी में थे -शायद नशे की। मामला BEO तक पहुंचा है, लेकिन कार्रवाई की प्रक्रिया “जांच” के नाम पर लंबी चल रही है। केस 4: ‘स्प्राइट’ की बोतल में रम- पहले में भी सस्पेंड हो चुके शिक्षक फिर शराब पीते पकड़े गए बालोद जिले के ग्राम चिपरा के कन्या प्राथमिक शाला में प्रधानपाठक सरजूराम ठाकुर स्कूल समय में शराब पीते पकड़े गए। उनके पास रखी स्प्राइट की बोतल से शराब की गंध आ रही थी। ये सब भाजपा के एक स्थानीय नेता ने दौरे के दौरान देखा और तुरंत खंड शिक्षा अधिकारी को फोन कर सूचना दी। गांववालों ने बताया कि सरजूराम इससे पहले में भी नशे की हालत में स्कूल में पकड़े गए थे और एक बार सस्पेंड हो चुके हैं। बावजूद इसके वह फिर स्कूल में शराब लाए इस बार बोतल में स्प्राइट की ढक्कन लगाकर। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों से बीते कुछ समय में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां शिक्षक नशे में स्कूल पहुंचे, बच्चों के साथ डांस किया, खुलेआम सस्पेंड होने की जिद की या शराबी हालत में बेहोश मिले। शिक्षक नशे में स्कूल आते हैं, वीडियो वायरल होता है, सस्पेंड होते हैं… फिर कुछ महीने बाद बहाल भी हो जाते हैं। न कोई मेडिकल जांच, न नशामुक्ति शिविर। ऐसा क्यों है कि एक बार सस्पेंड होने वाले शिक्षक दोबारा उसी स्कूल या आस-पास में तैनात हो जाते हैं? छत्तीसगढ़ में हर साल शिक्षकों पर नशे में स्कूल आने के कई आरोप लगते हैं। लेकिन इनमें से गिने-चुने मामलों में ही कार्रवाई होती है और बहुत कम मामलों में किसी स्थायी समाधान की पहल की जाती है। वहीं इस संबंध में बातचीत के लिए हमने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कॉल लगाया लेकिन अधिकारियों ने फोन ही नहीं उठाया। शिक्षाविद् जवाहर सूरी शेट्टी कहते हैं – यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन शिक्षकों को बच्चों को ज्ञान देना चाहिए, वही अगर शराब पीकर स्कूल आएंगे तो बच्चे उनसे क्या सीखेंगे? यह सिर्फ अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। ऐसे मामलों में पहली बार गलती करने वाले शिक्षकों की काउंसलिंग जरूरी है, ताकि उन्हें सुधार का मौका मिल सके।

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