भास्कर न्यूज | जालंधर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अपने संबद्ध स्कूलों को राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की स्व-वित्तपोषित इकाई (सेल्फ-फाइनेंसिंग यूनिट) शुरू करने की अनुमति दी है। बोर्ड की ओर से स्कूलों के प्राचार्यों को जारी निर्देशों में कहा गया है कि इस पहल का लक्ष्य छात्रों में सामाजिक सेवा, नेतृत्व क्षमता, सहानुभूति और नागरिक जिम्मेदारी को मजबूत करना है। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के माई भारत-एनएसएस अभियान के तहत स्कूल 50 से 100 स्वयंसेवकों की एनएसएस इकाई बना सकेंगे और सरकारी अनुदान की प्रतीक्षा किए बिना अपने संसाधनों से गतिविधियां संचालित कर सकेंगे। सीबीएसई के अनुसार एनएसएस की शुरुआत 1969 में महात्मा गांधी की जन्मशती के अवसर पर हुई थी और इसका आदर्श वाक्य मैं नहीं, बल्कि आप है। योजना के तहत विद्यार्थियों को दो वर्षों में कुल 240 घंटे सामुदायिक सेवा करनी होगी। गतिविधियों में वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, रक्तदान, साक्षरता और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम शामिल होंगे, साथ ही गोद लिए गांवों व झुग्गी क्षेत्रों में सात दिवसीय विशेष शिविर भी लगाए जाएंगे। बोर्ड ने बताया कि इकाइयां राज्य के एनएसएस लाइजन सेल के अधीन काम करेंगी और शुरुआती मान्यता पांच वर्ष के लिए होगी। नियमित गतिविधियों के लिए प्रति छात्र 600 रुपये तथा विशेष शिविर के लिए 1,000 रुपये की लागत सीमा तय की गई है। एनएसएस खाते का वार्षिक ऑडिट अनिवार्य होगा।


