कोरोना के बाद शहर को आगे बढ़ाने व युवाओं को अवसर देने के लिए प्रदेश की नई स्टार्टअप नीति तैयार की गई। इसके लिए ईको सिस्टम बनाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने जनवरी 2022 में स्टार्टअप पार्क बनाने की घोषणा की। तय किया गया कि इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) इसे बनाएगा। करीब 450 करोड़ का एस्टीमेट बनाया गया। सुपर कॉरिडोर पर 20 एकड़ जमीन भी चिह्नित की गई। अंतरराष्ट्रीय कन्सल्टेंट नियुक्त कर डिजाइन पर काम शुरू किया। डिजाइन भी तैयार हुई। प्रोजेक्ट को मंजूरी के लिए जैसे ही सरकार के पास भेजा, सुपर कॉरिडोर पर हाईराइज के नियम आड़े आ गए। स्टार्टअप पार्क की 90 मीटर ऊंचाई वाली डिजाइन को निरस्त कर दिया गया। उसके बाद से ही मामला ठंडे बस्ते में चला गया। बीते दिनों आईडीए बोर्ड बैठक में यह मामला फिर रखा गया। पीपीपी मोड पर बनाया जाएगा
तय किया गया कि अब सुपर कॉरिडोर नियमों के आधार पर ही इसका लेआउट व डिजाइन तैयार करें। बनाने के लिए पीपीपी मॉडल जैसे विकल्प भी देखे जा सकते हैं। इसके बाद से ही आईडीए कन्सल्टेंट इन संभावनाओं पर काम कर रहा है। अब दोबारा प्रक्रिया में लगेगा 6 से 12 महीने का समय, निवेशक मिलने पर ही शुरू हो सकेगा काम
02 हजार से ज्यादा स्टार्टअप शहर में
05 इन्क्यूबेशन सेंटर कर रहे काम घोषणा के साथ ही काम शुरू हो जाता तो ऐसा दिखता स्टार्टअप पार्क लागत 750 करोड़ तक संभव… जानकारों के अनुसार पीपीपी मॉडल पर बनाने में प्रोजेक्ट में देरी होगी। आईडीए कॉन्सेप्ट बनाएगा। सरकार से मंजूरी लेगा। इसके बाद एजेंसी की तलाश की जाएगी। एजेंसी आईडीए की डिजाइन व कॉन्सेप्ट पर काम करेगी या नहीं, यह सवाल रहेगा। दूसरा, एजेंसी की भी कुछ शर्तें रहेंगी। जो एजेंसी निवेश करेगी, वह अपनी भी सहूलियत देखेगी, क्योंकि प्रोजेक्ट पहले ही तकनीकी विकास की गति से पीछे रह गया है। आईडीए अफसरों का कहना है, वर्तमान स्थिति को देखते हुए लागत 450 करोड़ से बढ़कर 750 करोड़ से भी ज्यादा जा सकती है।
पीपीपी मॉडल से बनाने पर विचार
^स्टार्टअप पार्क के लिए नए मॉडल पर विचार चल रहा है। इसे बनाने में आईडीए निवेश नहीं करेगा। पीपीपी मॉडल पर बनाएंगे। जमीन आईडीए की रहेगी। डेवलपर इसे डेवलप करेगा और कंपनियों को बेचेगा। इसमें भी आईडीए की हिस्सेदारी किस तरह रहेगी, इन्हीं सब पर काम चल रहा है।
– दीपक सिंह, चेयरमैन, आईडीए


