स्टेट एलाइड एंड हैल्थ केयर काउंसिल:9 हजार छात्रों को द्वितीय वर्ष की परीक्षा का इंतजार; पैरामेडिकल के छात्र भुगत रहे लेटलतीफी का खामियाजा

राजस्थान स्टेट एलाइंड एंड हैल्थ केयर काउंसिल की लापरवाही व लेटलतीफी का खामियाजा पैरामेडिकल का कोर्स कर रहे छात्र-छात्राएं भुगतने को मजबूर हैं। हालात ये हैं कि दो साल की अवधि वाले कोर्स 4-4 साल में हो रहे हैं। सत्र 2021-22 में 12 तरह के पैरामेडिकल कोर्स में प्रवेश लेने के बाद 9 हजार से अधिक छात्रों की प्रथम वर्ष की थ्योरी परीक्षा मई-2024 और प्रायोगिक परीक्षा जुलाई-2024 में हुई। द्वितीय वर्ष की परीक्षा अब तक नहीं हुई। इसमें पहले थ्योरी और फिर प्रैक्टिकल परीक्षा में कम से कम तीन माह लगना तय है। इससे न केवल आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है, बल्कि कोर्स नहीं होने से डिप्रेशन का शिकार भी हो रहे हैं। ऐसे में कब परीक्षा होगी और कब परिणाम आएंगे, इस पर सवालिया निशान लग रहे हैं। समय पर डिग्री न मिलने से सरकारी नौकरी को नहीं कर सकते आवेदन विशेषज्ञों के अनुसार समय पर डिग्री नहीं मिलने से सरकारी नौकरी के लिए निकलने वाली भर्ती में आवेदन नहीं कर सकते। निजी संस्थानों में जब तक कोर्स नहीं होता, तब तक काम नहीं कर सकते, क्योंकि नियमानुसार किसी भी तरह का पैरामेडिकल कोर्स करने के बाद स्टेट काउंसिल में पंजीकरण होना अनिवार्य है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में कैथ लैब, डायलिसिस, ईईजी, एंडोस्कोपी की करोड़ों की लागत की मशीनें लगी हैं, लेकिन इन्हें चलाने वाला ही नहीं है। इससे मरीजों का इलाज भी प्रभावित हो रहा है। 10 साल में 4 कोर्स के सेवा नियम बने, 8 के नहीं राजस्थान स्टेट एलाइड हैल्थ एंड केयर काउंसिल का नाम पहले राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल था। यह 10 साल से पैरामेडिकल कोर्स संचालित कर रही है, लेकिन 12 में से सिर्फ चार कोर्स मेडिकल लैब टेक्नीशियन, असिस्टेंट रेडियोग्राफर, ऑफ्थेल्मिक असिस्टेंट और ईसीजी टेक्नीशियन के ही सेवा नियम बने हैं।
शेष 8 कोर्स डायलिसिस टेक्नीशियन, ब्लड बैंक, ऑपरेशन थिएटर, ईईजी, इमरजेंसी ट्रोमा, एंडोस्कोपी, कैथ लैब टेक्नीशियन जैसे कोर्सेज के सेवा नियम नहीं बनने से सरकारी नौकरी से वंचित हो रहे हैं। राजस्थान पैरामेडिकल एसोसिएशन के जतन कुमार का कहना है कि चिकित्सा सचिव से लेकर चिकित्सा मंत्री, मुख्यमंत्री से सेवा नियम बनाने के लिए कई बार मिल चुके हैं, लेकिन हमें आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। ऐसे में सरकारी नौकरी का सपना या रोजगार नहीं मिलने के कारण फिर मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ सकता है। सेवा नियम सरकार बनाती है “हम जल्द ही परीक्षा आयोजित करवाएंगे। सेवा नियम के लिए सरकार के पास फाइल भेजी है। वे ही बनाते हैं।”
-उत्तम सिंह शेखावत, रजिस्ट्रार, राजस्थान स्टेट एलाइड हैल्थ एंड केयर काउंसिल

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