शहर की सीवरेज और वल्लभगार्डन के पास बनी पाल ना सिर्फ आसपास की बस्तियों के लिए बल्कि अब तो जयपुर-जोधपुर पुल के लिए भी मुसीबत बन गई है। कई दिनों यहां पानी भरा है। पीडब्ल्यूडी ने निगम को पत्र लिखा और पुल की सुरक्षा को खतरा बताया। पानी निकालने के लिए निगम की टीम पहुंची तो चौतरफा विरोध हुआ। स्थानीय लोगों का भय था कि कहीं इस गंदे पानी को उनकी तरफ न निकाल दिया जाए। निगम अधिकारी हैरान हैं कि ऐसी दशा में इस पानी को कहां ले जाएं। दरअसल पूरे शहर की सीवरेज का पानी दो ही जगह एकत्र होता है। एक वल्लभगार्डन और दूसरा गंगाशहर के पास। वल्लभगार्डन में जहां पानी एकत्र होता वहां मिट्टी की पाल बनी है। जो आए दिन दरकती रहती है। कुछ दिनों से यहां का पानी बहते हुए जयपुर-जोधपुर बाईपास पुल तक पहुंच गया। पुल की दीवारों से पानी छूने लगा। पीडब्ल्यूडी की हाई-वे शाखा के अधीक्षण अभियंता पंकज यादव ने नगर निगम को पत्र लिखा कि इस पानी को वहां से निकाला जाए वरना पुल की सुरक्षा को खतरा बढ़ जाएगा। क्योंकि ये हाईवे का पुल है तो और दिक्कत होगी। पीडब्ल्यूडी के पत्र को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम की टीम रविवार को पुल के पास पहुंची और पानी निकालना शुरू ही किया था कि आसपास की बस्ती के लोग एकजुट हो गए। विरोध किया कि ये पानी बस्ती की ओर ना छोड़ा जाए। जो खेती कर रहे वहां के आसपास के खेत मालिक पहुंच गए कि उनके खेतों में गंदा पानी ना छोड़ा जाए। कैमल फेस्टीवल से जुड़े लोग भी पहुंच गए कि एनआरसीसी के आसपास भी पानी ना छोड़ा जाए क्योंकि यहां देशी विदेशी सैलानी आएंगे। निगम यहां फंसा हुआ है कि आखिर इस पानी को ले कहां जाएं। थोड़ा बहुत पानी है नही जो टैंकरों से हटाया जाए। उसे तो पाइप और पंप लगाकर निकालना होगा पर निकालें कहां, इसको लेकर विवाद हो रहा है। अधिकारियों का संकट, फिर टूट सकती है पाल रिसाव के पानी को ही निगम को निकालने में जोर आ रहा है। कहीं ऐसे में पाल टूट गई तो और मुसीबत बढ़ जाएगी। इसलिए निगम अधिकारी इस पानी को निकालने के साथ पाल पर भी ध्यान दे रहे हैं। उपायुक्त यशपाल आहूजा और इंजीनियरों के साथ दिनभर मौके पर रहे। हालांकि गंदे पानी को निकालने का रास्ता खबर लिखे जाने तक नहीं मिला।


