कंपनियां डिग्री देखती हैं मगर हुनर को सलाम करने वालों की कमी भी नहीं है। भारत सरकार की स्किल डेवलपमेंट योजना ने लोगों को चाहे सम्मान जनक रोजगार न दिलाए हों मगर बीकानेर के इंजीनियर ने कम शिक्षित युवाओं को मोटीवेशन से तकनीक के क्षेत्र में स्थापित करके दिखाया है। युवा सिर्फ रोजगार ही नहीं बड़े पैकेज भी हासिल कर रहे हैं। सपनों की ऊंचाई को पंख देने के लिए सिर्फ इच्छाशक्ति और मेहनत की जरूरत होती है। सफलता उन लोगों का इंतजार करती है, जो खुद पर विश्वास करते हैं और अपने हालात को बदलने का साहस रखते हैं। यह स्टोरी बीकानेर के ऐसे ही युवाओं की है, जो गरीबी, शिक्षा की कमी और सामाजिक बंदिशों के बावजूद आज तकनीकी क्षेत्र में बड़ी-बड़ी कंपनियों में अपनी जगह बना चुके हैं। इनमें से कुछ दर्जी थे, तो कुछ टीवी मैकेनिक, लेकिन एक अद्भुत मार्गदर्शक और अपने दृढ़ निश्चय के बल पर उन्होंने वह मुकाम पाया, जो कभी उनकी कल्पना से भी परे था। इन युवाओं को देश की विभिन्न कंपनियों में 50 हजार से लेकर 1.5 लाख महीने तक के पैकेज मिल रहे हैं। मुरली स्वामी: टीवी मैकेनिक से एंड्रॉइड एप डेवलपर तक का सफर दसवीं पास नहीं कर सके मुरली स्वामी, एक साधारण टीवी मैकेनिक थे, आज एक सफल एंड्रॉइड एप डेवलपर हैं। उनका जीवन एक नई दिशा में तब मुड़ा, जब उन्हें एक साथी ने तकनीकी क्षेत्र में कॅरियर बनाने का सुझाव दिया। मुरली ने काउंसलर पुखराज की देखरेख में काम सीखा। आज वे एक फ्रीलांसर के रूप में काम कर रहे हैं और उनके बनाए एप्स कई अमेरिकी कंपनियों द्वारा उपयोग किए जा रहे हैं। शिवलाल: बारहवीं में फेल और सीनियर फ्रंट-एंड डेवलपर का सफर शिवलाल का जीवन भी बाबूलाल जैसा ही था। बारहवीं में असफलता के बाद टूट चुका था। परिवार की आर्थिक तंगी ने उन्हें दर्जी का काम करने पर मजबूर कर दिया। लेकिन काउंसलर ने उन्हें समझाया कि डिग्री की कमी बाधा नहीं बन सकती। शुरूआत में प्रोग्रामिंग की बारीकियां समझने में परेशानी हुई, लेकिन अब शिवलाल जी-एक्सॉन कंपनी में सीनियर फ्रंट-एंड डेवलपर हैं। तकनीकी शिक्षा के बदलते परिदृश्य के नायक पुखराज इन सभी कहानियों के पीछे पुखराज प्रजापत का नाम है। बीकानेर इंजीनियरिंग कॉलेज के 2003 बैच के छात्र पुखराज ने खुद तकनीकी क्षेत्र में महारत हासिल की और अपने अनुभव को दूसरों की जिंदगी संवारने में लगाया। वे मानते हैं कि अगर किसी के अंदर सीखने की प्रबल इच्छा है, तो उसे कोई नहीं रोक सकता। काउंसलर पुखराज प्रजापत कहते हैं कठिन परिस्थितियां सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं, सपनों को पूरा करने का जज्बा और सही मार्गदर्शनचाहिए। पुखराज अब तक 20 युवाओं को उनके सपनों से भी आगे की मंजिल तक पहुंचा चुके हैं। पुखराज के साथ काम कर रहे वेब डेवलपर हिमांशु व्यास ने बताया कि काम करने के लिए सिर्फ डिग्री डिप्लोमा ही नहीं कड़ी मेहनत से पाई गई दक्षता भी मंजिल तक ले जाती है। प्रकाश: गांव निकलकर बना फुल स्टैक डेवलपर सोहा गांव के प्रकाश कुमावत का जन्म एक दिव्यांग किसान के घर में हुआ। परिवार बारिश पर निर्भर खेती से जीवन यापन करता था। बचपन से ही आर्थिक तंगी के बीच बड़े होने वाले प्रकाश के पास न संसाधन थे और न ही तकनीकी शिक्षा का अनुभव। बीए की पढ़ाई के दौरान तकनीकी क्षेत्र में कॅरियर बनाने की तरफ कदम बढ़ाने शुरू कर दिए। हालांकि, गांव से रोजाना बीकानेर तक सफर करना आसान नहीं था। कड़ी ठंड, तेज गर्मी और बारिश की बाधाओं को पार करते हुए प्रकाश ने हर दिन अपने सपनों के लिए संघर्ष किया। वर्तमान में वे जेएड प्लेज कंपनी में फुल स्टैक डेवलपर के रूप में काम कर रहे हैं। प्रकाश का कहना है, मेहनत और सही मार्गदर्शन ने मेरी जिंदगी बदल दी। आज मैं अपने परिवार का गर्व बन चुका हूं। बाबूलाल: 12वीं फेल डेवलप कर रहा सॉफ्टवेयर बाबूलाल का जीवन कभी एक साधारण दर्जी की दुकान तक सीमित था। 12वीं तक पढ़ाई के बाद उनका भविष्य अंधेरे में था। दिनभर सिलाई करते हुए उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि वे एक दिन सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनेंगे। काउंसलर ने जब बाबूलाल को तकनीकी क्षेत्र में अपना करियर बनाने की सलाह दी, तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ। बाबूलाल ने कहा मुझे लगा कि मैं टेक्नोलॉजी जैसे बड़े क्षेत्र के लिए बना ही नहीं हूं। लेकिन काउंसलर ने मुझे भरोसा दिलाया कि मेहनत और सही मार्गदर्शन से सब संभव हुआ। वर्तमान में बाबूलाल मास्टर इंडिया (साफ्टवेयर डेवलपर) कंपनी में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम कर रहे हैं और एक बड़ी टीम का नेतृत्व कर रहे हैं।


