स्पीड ब्रेकर बनाने का मकसद ये है कि दुर्घटनाएं कम हों, लेकिन भोपाल में ये खुद ही दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। इसकी वजह है गलत प्लानिंग और निर्माण में मानकों की अनदेखी। ट्रैफिक दबाव वाली कई प्रमुख सड़कों पर काफी दूर-दूर तक स्पीड ब्रेकर बनाए ही नहीं गए हैं। जिन सड़कों पर बनाए गए हैं, उनमें कुछ बहुत ऊंचे हैं तो कुछ इतने नीचे कि रोड से ही मिल गए हैं। कई ऐसे हैं जिनका आधा हिस्सा गायब हो चुका है। स्पीड ब्रेकर की ऊंचाई ज्यादा होने से न सिर्फ हादसे होते हैं, बल्कि रीढ़ की हड्डी और जोड़ों पर बुरा असर पड़ता है। कई सड़कों पर रोड बंपर यानी रबर के काले और पीले रंग के ब्रेकर लगे हैं। इनकी डिजाइन ऐसी है कि झटका लगने से वाहनों के पार्ट्स डैमेज हो जाते हैं। कई सड़कों पर स्ट्रीट लाइट न होना भी बड़ी परेशानी है। अंधेरे में ब्रेकर का पता नहीं चलता और हादसे हो जाते हैं। सुरक्षा से ज्यादा खतरा… गुजरते वक्त लगता है तेज झटका, जोड़ों पर विपरीत असर, वाहनों में भी हो रही टूटफूट गोविंदपुरा… वाहनों से टकराते हैं स्पीड ब्रेकर यहां मुख्य सड़क पर बने ब्रेकर की ऊंचाई 7.5 इंच है। बिजली नगर कॉलोनी के सामने ब्रेकर की ऊंचाई 6 इंच है। यहां कारों का निचला हिस्सा अक्सर ब्रेकर से टकराता है। बाइक में तो टूट-फूट हो जाती है। गोविंदपुरा के कई स्पीड ब्रेकर में स्लोप ही नहीं है, जिससे झटके बहुत लगते हैं। रहवासियों का कहना है कि रात में स्ट्रीट लाइट नहीं जलती तो परेशानी और बढ़ जाती है। भेल… न पेंट न रेडियम, रात में नजर ही नहीं आते ब्रेकर यहां कई स्पीड ब्रेकर की ऊंचाई 4 इंच से ज्यादा है। मिलिट्री कैंटीन के बाहर बने स्पीड ब्रेकर की ऊंचाई 6 इंच है। पुलिस आवासीय परिसर के 400 मीटर बाद पड़ने वाले चौराहे पर बने ब्रेकर की ऊंचाई भी 6 इंच है। लोगों का कहना है कि रात के समय अगर गाड़ी थोड़ी स्पीड में हो तो हादसा हो जाता है। भेल कॉलोनियों में बने ब्रेकर पर न तो सफेद या पीला पेंट है और न ही रेडियम इस्तेमाल किया गया है। लोगों ने बताया कि कई क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट नहीं होने से रात में ब्रेकर नजर नहीं आते और हादसे होते हैं। उजाले में भी ब्रेकर का पता नहीं चलता, क्योंकि दूर से बदहाल सड़क और ब्रेकर एक समान दिखाई देते हैं। कुछ जगह ब्रेकर पर पेंट किया था, लेकिन वह उखड़ चुका है। जिंसी और बोगदा पुल.. जरा भी तेज नहीं चला सकते गाड़ी यहां भी ब्रेकर की ऊंचाई 4 इंच से ज्यादा है। गाड़ी थोड़ी भी तेज चले तो अचानक झटका लगता है। दो पहिया वाहनों के लिए ये ब्रेकर परेशानी का कारण बन चुके हैं। लोग कहते हैं कि यहां से रोज निकलना होता है और लगभग रोज ही वाहनों को झटके लगते हैं। सड़क पर भी गड्ढों की वजह से काफी परेशानी होती है। यहां भी समस्या : तरण पुष्कर, अवधपुरी, बागसेवनिया और नर्मदापुरम रोड जैसे इलाकों में भी कई स्पीड ब्रेकर की ऊंचाई ज्यादा होने की वजह से दुर्घटनाएं होती हैं। स्पीड ब्रेकर के ये मानक… स्पीड ब्रेकर को लेकर हमने तय किया था कि पहले सड़क सुरक्षा समिति में प्रस्ताव लाया जाएगा। उसके बाद ही मानकों के आधार पर स्पीड ब्रेकर बनाए जाएंगे। अगर कहीं नियम विरुद्ध बनाए जा रहे हैं, तो संबंधित एजेंसी को उसे ठीक करने के निर्देश देंगे। – कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर भोपाल


