स्लॉटर हाउस से बाहर निकले मीट में गोमांस के मुद्दे पर शहर की राजनीति गर्म है। परिषद की बैठक में तीखे तेवर के बाद अघ्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने महापौर मालती राय और निगमायुक्त संस्कृति जैन दोनों को निशाने पर लिया है। उनका सवाल है कि आखिर महापौर और कमिश्नर स्लॉटर हाउस के संचालन की अनुमति का प्रस्ताव परिषद में लेकर क्यों नहीं आए? नगर निगम अपनी तरफ से असलम के खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं करा रहा है? अध्यक्ष के आरोपों पर कमिश्नर ने कार्रवाई करने की बात कही। इधर, महापौर ने कहा कि स्लॉटर हाउस के टेंडर से लेकर वर्क ऑर्डर की पूरी प्रक्रिया प्रशासक कार्यकाल की है। पीपीपी आधार पर बने इस स्लॉटर हाउस में नगर निगम के बजट से राशि खर्च नहीं हुई है, इसलिए परिषद में लाने की जरूरत नहीं है। परिषद अध्यक्ष VS महापौर हर जवाब पर उठ रहे सवाल सूर्यवंशी का आरोप – पिछले परिषद कार्यकाल में तो स्लॉटर हाउस का मुद्दा परिषद में आता था। अगर महापौर नहीं ला रहीं थीं तो कमिश्नर को यह काम करना था। सूर्यवंशी- इस मामले में अब तक जितनी भी कार्रवाई हुई है वह या तो हिंदू संगठनों ने किया है या पुलिस ने। नगर निगम स्लॉटर हाउस संचालक असलम के खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं करा रहा? सूर्यवंशी – असलम ने कहा है कि स्लॉटर हाउस का संचालन नगर निगम कर रहा है। फिर निगम पीपीपी कहकर कैसे बच रहा है? कमिश्नर पर आरोप- मानवाधिकार आयोग द्वारा असलम की शिकायत पर जांच डीसीपी जोन-1 आईपीएस आशुतोष गुप्ता ने कर क्लीनचिट दी। गुप्ता निगमायुक्त के पति हैं। वे इसी वजह से कार्रवाई नहीं कर रहीं। महापौर का जवाब – पीपीपी मोड पर बने स्लॉटर हाउस में निगम की राशि खर्च नहीं हुई। और बाकी प्रक्रिया प्रशासक कार्यकाल में हो गई थी। इसलिए इसकी आवश्यकता नहीं थी। महापौर- नगर निगम प्रशासन की ओर से शाम को ही पुलिस को पत्र लिखा गया है। पुलिस की कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद जरूरत हुई तो निगम भी असलम पर एफआईआर कराएगा। महापौर- असलम ने यह बात पिछले साल अक्टूबर महीने में कही थी। हमने स्लॉटर हाउस असलम को 7 नवंबर 2025 को सौंपा। कमिश्नर संस्कृति जैन का जवाब- इस प्रकरण में हमारी तरफ से नियमानुसार हर संभव कार्रवाई की जा रही है। महापौर को पद से हटाने कांग्रेस संभागायुक्त को सौंपेगी पत्र
पार्षद गुड्डू चौहान ने कहा- महापौर ने परिषद को बताए बिना बेशकीमती जमीन निजी व्यक्ति को दी। गोमांस मामले में कोई भी कार्रवाई नहीं हुई। यह नगरपालिक निगम अधिनियम के तहत कदाचरण है। कांग्रेस महापौर को हटाने के लिए संभागायुक्त को पत्र सौंपेगी। आरोप: स्लॉटर हाउस में रोहिंग्या… राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने पिछले साल जून में शिकायत की थी कि स्लॉटर हाउस में रोहिंग्या काम कर रहे हैं। तब के डीसीपी जोन-1 आईपीएस आशुतोष गुप्ता ने 24 अक्टूबर की रिपोर्ट में इसे गलत बताया था।


