राजधानी में 200 में से 112 टॉयलेट स्वच्छता श्रृंगार योजना में आते हैं। इनमें से 106 सुलभ इंटरनेशनल के पास हैं। जिसे हर माह लाखों का पेमेंट किया जाता है। योजना शर्त के अनुसार संचालक एजेंसी को 24 घंटे टॉयलेट की निशुल्क सुविधा देनी है। दिन में 2 बार सफाई, साबुन, सोप डिस्पेंसर, सेनेटरी नेपकिन आदि रखना है। एजेंसी को निरीक्षक रखना है। भास्कर सर्वे में पता चला है कि एजेंसी के निरीक्षक टॉयलेट तक नहीं जाते। नगर निगम कमिश्नर, 10 जोन कमिश्नर 50 से अधिक अफसरों के पास भी निरीक्षण का जिम्मा है, पर वो सड़को की सफाई तक सीमित हैं। निरीक्षण दिखावे का हो रहा है। इसका सबूत संचालन में कमी पर लगने वाला जुर्माना है। जिम्मेदार अधिकारी, जनप्रतिनिधि के अपने-अपने तर्क सुलभ इंटरनेशनल प्रभारी का तर्कः
दिक्कत आ रही है मई 2024 से भुगतान नहीं हुआः अगस्त से पेमेंट नहीं मिलने से साबुन जैसी व्यस्था देने में दिक्कत आ रही है। केयर टेकर की उपस्थिति पर हम ध्यान देते हैं। कई बार किसी काम से वो बाहर रहते हैं। जिसके कारण आपको वो उपस्थित नहीं मिले।
नवीन झा, इंचार्ज, सुलभ इंटरनेशनल निगम कमिश्नर का जवाबः 150-200 टॉयलेट की सफाई खुद जाकर देखी हैः हर वार्ड में मेरे समेत सभी कर्मचारी अफसर लगातार दौरा करके स्थिति का जायजा ले रहे हैं। पब्लिक टॉयलेट में जहां गंदगी मिल रही है। उसे तत्काल सुधार के लिए बोल रहे हैं। एजेंसी पर सख्ती भी बरती जा रही है।
– विश्वदीप, नगर निगम, कमिश्नर महापौर का जवाबः एजेंसियां जिम्मेदारी नहीं निभा रहीं हैं: विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत अलग-अलग कैटेगिरी के टॉयलेट चल रहे हैं। एजेंसियां जिम्मेदारी नहीं निभा रही हैं। ये टॉयलेट किन अनुबंध शर्तों पर चल रहे हैं। हम इसे देख रहे हैं। हम स्थितियां सुधारने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम टॉयलेट को लेकर एकरूपता लाने जा रहे हैं। ताकि लोगों को अच्छी सुविधाएं मिले। -मीनल चौबे, महापौर, रायपुर ननि


