प्रो. दरबारी लाल ने स्कूलों और कॉलेजों के प्रिंसिपल और अध्यापकों से कहा कि वह बच्चों को देश के स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास वाकिफ करवाए। ताकि भारत के इन भविष्य निर्माताओं को सदियों की गुलामी के कारणों की पूरी जानकारी हासिल हो सके। पश्चिमी शिक्षा का प्रभाव, कूका आंदोलन, आर्य समाज के जन्मदाता स्वामी दयानंद जी द्वारा समाज सुधार का आंदोलन, सिंह सभा का स्थापित करना, स्वामी विवेकानंद द्वारा भारत की उच्च कोटि की संस्कृति का विदेशों में प्रचार करना और 1885 में क्रांतिकारी परिवर्तन आना था। प्रो. लाल ने शहर के सभी स्कूल प्रबंधकों को अनुरोध किया कि वह अपने अध्यापक साहिबान की ड्यूटियां लगाए कि वह स्वतंत्रता दिवस के बारे में विद्यार्थियों के बीच संगोष्ठी करवाए और उन्हें आजादी के लिए किए आंदोलनों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दें। ताकि हम सब मिलकर एक स्वस्थ समाज और सृदढ़ राष्ट्र का निर्माण कर सके। सभी नागरिकों को 15 अगस्त वाले दिन अपने घरों के उपर राष्ट्रीय ध्वज लहराने चाहिए।


