पाली में एक ही बस्ती में रहने वाले 36 लोगों के नाम एक व्यक्ति की ओर से आपत्ति दर्ज करवाने के कारण वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। खास बात यह है कि इसमें स्वतंत्रता सेनानी की विधवा पत्नी, सरकारी सेवा से रिटायर्ड हुए व्यक्ति से लेकर सरकार से पेंशन ले रहे लोगों के नाम शामिल है। जो पिछले कई सालों से रह रहे है। मामला ध्यान में आने पर प्रशासन की ओर से इन्हें निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया गया। मामला पाली शहर के हाउसिंग बोर्ड के चिमनपुरा सिंधियों की ढाणी क्षेत्र का है। यहां रहने वाले 36 लोगों के नाम एक व्यक्ति की ओर से आपत्ति दर्ज करवाने के कारण हटा दिए गए। ऐसे में सभी लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी पीड़ा एसडीएम विमलेंद्र सिंह राणावत को बताई। जिस पर उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले निष्पक्ष जांच होगी। किसी की ओर से शिकायत दर्ज करवाने भर से नाम नहीं हटाएं जा सकते है। इस पर वे शांत हुए।
उन्होंने बताया कि जिनके नाम कटे वे सालों से पाली में रह रहे है और अधिकतर सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुए है। बीएलओ को उन्होंने फॉर्म भी भरकर दिया, लेकिन उनके खिलाफ आपत्ति दर्ज होने से उनका नाम कट गया है। स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी का नाम काटा
सिंधियों की ढाणी में रहने वाली 85 साल की शरीफा खातुन के पति बच्चू खान स्वतंत्रता सेनानी रहे। उन्होंने साल 1965 में देश के लिए सीमा पर लड़ाई लड़ी थी। आपत्ति के कारण 85 साल की शरीफा खातून का भी SIR से नाम काट दिया गया। पूर्व पार्षद बोले- 2002 की मतदाता सूची में है नाम
मामले में पूर्व पार्षद पदमसिंह राणावत ने कहा कि चिमनपुरा सिंधियों की ढाणी से जिनके नाम काटे गए है। उनमें से ज्यादातर सरकारी नौकरी कर चुके हैं। इनके पिता-दादा भी यहां रहते थे। इनके परिवार का नाम 2002 की मतदाता सूची में है। इनके नाम कटाने के लिए किसी एक व्यक्ति ने आपत्ति लगाई है। नगर परिषद में करते थे नौकरी
सिंधियों की ढाणी में रहने वाले शफी मोहम्मद ने बताया कि उनके पंचायत समिति में और वे नगर निगम पाली में नौकरी करके रिटार्यड हो चुके है। बीएलओ कहता है हमने फॉर्म भरकर दिया, उसे रिजेक्ट कर दिया है।
बीएलओ के फॉर्म की कॉपी मेरे पास है। कांजरी में नौकरी की, आपत्ति के कारण नाम काट दिया
सिंधियों की ढाणी में रहने वाले जस्सू खान कहते है कि उन्होंने कांजरी में नौकरी की। लेकिन उनका नाम SIR में काट दिया है। बच्चों का नाम सूची में है। इसको लेकर आपति दर्ज करवाई गई है। दोनों पति-पत्नी का नाम काटा
सिंधियों की ढाणी निवासी हमीर खान कहते है कि वे काजरी से साल 2015 में
सेवानिवृत्त हुए है। लेकिन SIR में उनका और पत्नी का नाम काट दिया।
इसको लेकर आपत्ति दी है।


