भास्कर संवाददाता| सीहोर गजेंद्र हाथी और मगरमच्छ का प्रसंग सुनाते हुए बुधवार को सिंधी कॉलोनी मैदान पर शिव शक्ति सांस्कृतिक मंडल द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचक प्रज्ञा विष्णु प्रिया ने कहा कि स्वयं को ही बुरे कर्मों का फल भुगतना होता है। परिजन साथ नहीं निभाते हैं। जब मगरमच्छ ने गजेंद्र का पैर जकड़ लिया, तो गजेंद्र ने सभी को मदद के लिए पुकारा, लेकिन कोई बचाने नहीं आया। पत्नी, बेटों सहित सभी परिजनों ने भी सहायता करने से मना कर दिया और कहा कि अपने कर्मों की सजा स्वयं भुगतो। इसलिए कर्म सोच-समझकर ही करना चाहिए। बुधवार को सिंधी कॉलोनी मैदान पर श्रीमद भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्म उत्सव मनाया गया। पीले वस्त्र पहनकर महोत्सव में महिलाएं शामिल हुईं। बुजुर्ग खूब नाचे और कथा का आनंद लिया। मृत्यु कब हो जाएगी, पता भी नहीं चलेगा: प्रज्ञा विष्णु प्रिया ने कहा कि मृत्यु का कोई भरोसा नहीं है। कब आ जाए, पता नहीं। इसलिए संसार के लिए नहीं, ठाकुरजी के लिए रो लेना चाहिए। दुख आए तो समझ लेना कि ठाकुरजी लीला कर रहे हैं। भक्ति को जगा रहे हैं। सही मार्ग दिखा रहे हैं। ठाकुरजी हर इच्छा पूरी करते हैं। विश्वास करके देख लीजिए। ठाकुरजी की लीला के आगे आपकी हमारी क्या इच्छा चलती है। अच्छे के लिए करते हो तो आपको अच्छा ही परिणाम मिलेगा और बुरा कर दिया तो परिणाम भी नकारात्मक ही आएगा। गजेंद्र के लिए कोई प्राण देने को तैयार नहीं था। गजेंद्र का पूरा परिवार दूर हो गया था। इसलिए ठाकुरजी को परिवार से ऊपर रखो। किसी का भरोसा नहीं है, तो भी मृत्यु कब हो जाएगी, पता भी नहीं चलेगा।


