चित्रकूट स्थित धारकुंडी आश्रम के संस्थापक महान संत स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज का 102 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हो गया। उनके ब्रह्मलीन होने की खबर से चित्रकूट समेत देशभर में उनके अनुयायियों में शोक की लहर दौड़ गई है। धारकुंडी आश्रम के संत संजय महाराज ने बताया कि उनका निधन मुंबई के बदलापुर आश्रम में हुआ। स्वामी जी का पार्थिव शरीर शनिवार शाम तक चित्रकूट लाया जाएगा। रविवार को उनके दर्शन के लिए भक्तों को अनुमति दी जाएगी, और सोमवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। आश्रमों में श्रद्धालुओं ने दीप जलाकर और भजन-कीर्तन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज का 101वां जन्मोत्सव 1 जनवरी 2025 को चित्रकूट से सटे धारकुंडी आश्रम में धूमधाम से मनाया गया था। इस अवसर पर उन्होंने बदलापुर से वर्चुअल माध्यम से श्रद्धालुओं को दर्शन दिए और आशीर्वचन प्रदान किए थे। महाराज जी ने 22 नवंबर 1956 को अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन स्वामी परमानंद जी के आशीर्वाद से धारकुंडी क्षेत्र में आश्रम की स्थापना की थी। उन्होंने घने जंगल वाले इस क्षेत्र में कठोर साधना की। उनका गुरुद्वारा चित्रकूट स्थित सती अनसूया आश्रम में था, जहां से उन्होंने आध्यात्मिक चेतना का प्रसार किया। लगभग चार माह पहले स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज चित्रकूट आए थे। उनके दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी। वे मुंबई से हवाई जहाज द्वारा चित्रकूट पहुंचे और फिर कार से अपने धारकुंडी आश्रम गए थे। इस दौरान पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह भी उनसे मिलने आश्रम पहुंचे थे। स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज का जीवन साधना, सेवा और सनातन परंपराओं के संरक्षण को समर्पित रहा। उनके निधन से आध्यात्मिक जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। उनके विचार और मार्गदर्शन आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे।


