हजीरा गोलीकांड, आरोपी राहुल राजावत को अंतरिम जमानत से इनकार:निजी अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल, CMHO को जांच के निर्देश

बहुचर्चित हजीरा गोलीकांड में ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने आरोपी राहुल राजावत को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने आरोपी द्वारा प्रस्तुत निजी अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाते हुए ग्वालियर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को संबंधित निजी अस्पताल की कार्यप्रणाली और उपचार से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फडके ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपी ने अपनी पत्नी और नाबालिग बच्चे की गंभीर बीमारी का हवाला देकर अंतरिम जमानत मांगी थी, लेकिन स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट से इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी। मेडिकल रिपोर्ट में विरोधाभास कोर्ट ने पाया कि आरोपी की ओर से प्रस्तुत निजी अस्पताल के मेडिकल दस्तावेज, स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट से मेल नहीं खाते। प्रथम दृष्टया ये दस्तावेज भ्रामक प्रतीत होते हैं, जिस पर न्यायालय ने कड़ी आपत्ति जताई है। क्या है मामला यह प्रकरण हजीरा थाना क्षेत्र में जून 2025 में हुए गोलीकांड से जुड़ा है। इस घटना में एक युवक की मौत हो गई थी, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हुआ था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, वारदात में कई आरोपियों ने मिलकर फायरिंग की थी। जांच में सामने आया कि आरोपी राहुल राजावत पर घटना का षड्यंत्र रचने, मुख्य आरोपियों को उकसाने, उन्हें संरक्षण देने और आर्थिक मदद उपलब्ध कराने के आरोप हैं। इसी आधार पर उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। तीसरी बार मांगी थी अंतरिम जमानत आरोपी ने तीसरी बार अंतरिम जमानत के लिए आवेदन किया था। उसने दलील दी थी कि उसकी पत्नी पहले सेप्टिक शॉक जैसी गंभीर स्थिति से गुजर चुकी है और उसे नियमित चिकित्सा देखरेख की आवश्यकता है। इसके अलावा उसका नाबालिग बच्चा एनीमिया से पीड़ित है, जिसके इलाज और देखभाल के लिए पिता की मौजूदगी जरूरी है। हाईकोर्ट के निर्देश पर पत्नी और बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति के आकलन के लिए एक स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया था। बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि आरोपी की पत्नी की हालत फिलहाल स्थिर है और बच्चा उपचार योग्य अवस्था में है। कोर्ट का सख्त रुख मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत से इनकार करते हुए निजी अस्पताल की भूमिका की जांच के निर्देश दिए हैं। फिलहाल आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में रहेगा और मामले की सुनवाई जारी रहेगी।

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