हतबंध| ब्राह्मण पारा हथबंद में शुक्ला परिवार द्वारा आयोजित हरिवंश महापुराण कथा के विश्राम दिवस में कथा वाचक डॉ महंत वेदप्रकाशाचार्य ने कृष्ण कथा का वर्णन करते हुए कहा कि जो सबको आनंद से भर दे वही नंद है। इसीलिए आनंद कंद श्री कृष्ण ने नंद जी के यहां रहकर अपनी सुंदर बाल लीलाओं से पूरे ब्रज क्षेत्र और ब्रजवासियों को अनुपम आनंद से भर दिया। इसके बाद क्रमशः वृन्दावन की लीला, कंश वध, द्वारिका गमन और वहां सोलह हजार एक सौ आठ कन्याओं से विवाह एवं वंश विस्तार का वर्णन करते हुए अंत में परम धाम गमन की कथा सुनाते हुए कथा को विश्राम दिया गया। महाराज ने अंत में यह संदेश दिया कि सनातन धर्म ही सत्य है आदि में भी सनातन था और अंत में भी सनातन ही रहेगा। महाभारत में भगवान ने कहा है कि मैं ही धर्म हूं धर्मों रक्षति रक्षित: जो धर्म की रक्षा करता है उसकी रक्षा धर्म स्वयं करता है। श्री कृष्ण ने गीता में कहा है सर्वधर्मान् परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज जो सभी प्रकार के सांसारिक एवं शारीरिक धर्मों को त्याग कर मेरे शरण में आता है। उसके सब योग क्षेम की रक्षा मैं स्वयं करता हूं इसलिए हमें अपने धर्म की रक्षा अवश्य करना चाहिए चाहे कितनी भी प्रतिकूलताएं क्यों न हो। कथा विश्राम के पूर्व व्यास पूजा, वेदी पूजा, गौदान, हवन एवं पोथी यात्रा के साथ हर्षोल्लास एवं आनंद के साथ पूर्णाहुति दी गई।


