हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय पर अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन का ‘खेजड़ी बचाओ–पर्यावरण बचाओ’ आंदोलन के तहत धरना जारी है। इस धरने में बड़ी संख्या में मजदूर, किसान और पर्यावरण प्रेमी शामिल हो रहे हैं। आंदोलन की मुख्य मांगों में खेजड़ी वृक्षों की कटाई के खिलाफ सख्त कानून बनाना, सोलर कंपनियों को भूमि आवंटन पर रोक लगाना और भूमिहीनों को जमीन आवंटित करना शामिल है। यूनियन के जिलाध्यक्ष जगजीत सिंह जग्गी ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें सोलर कंपनियों के दबाव में फैसले ले रही हैं। उन्होंने बताया कि इसी के परिणामस्वरूप बीकानेर और जोधपुर जिलों में लगभग दो लाख बीघा भूमि सोलर कंपनियों को आवंटित की गई है, जबकि यह भूमि सीलिंग एक्ट के अंतर्गत आती थी। उन्होंने यह भी कहा कि इस भूमि में वन क्षेत्र भी शामिल था, जहां खेजड़ी सहित अनेक पेड़ काट दिए गए। जगजीत सिंह जग्गी ने मांग की कि खेजड़ी काटने वालों के लिए 7 वर्ष की सजा और 5 लाख रुपए का जुर्माना निर्धारित किया जाए, ताकि राजस्थान की पहचान और पर्यावरण को बचाया जा सके। संगठन के प्रदेश सचिव रघुवीर वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार बड़े कॉरपोरेट घरानों के सामने झुक चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार अब और 6 लाख बीघा भूमि सोलर कंपनियों को देने की तैयारी में है, जिससे लगभग 18 लाख पेड़-पौधे, जिनमें बड़ी संख्या में खेजड़ी वृक्ष शामिल हैं, कट जाएंगे। उन्होंने बताया कि बीकानेर से शुरू हुआ यह आंदोलन पूरे राजस्थान की जनभावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है। जिला सचिव प्रहलाद ने बताया कि धरना लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जो भूमि भूमिहीनों को मिलनी चाहिए थी, वह कॉरपोरेट को दे दी गई है, इसी के विरोध में संगठन पूरे राजस्थान में आंदोलन कर रहा है। बुधवार को धरने पर पवन कुमार, ओम स्वामी, जसवंत सिंह, मलकीत सिंह सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।


