हनुमानजी की जाति क्या, ओपी राजभर ने ‘भर’ बताया:पहले दलित-आदिवासी और ब्राह्मण होने का दावा; जन्मस्थल पर भी है विवाद

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 27 दिसंबर को कहा- हनुमानजी का जन्म राजभर परिवार में हुआ था। आज भी लोग राजभरों को भर यानी वानर कहते हैं। ऐसा पहली बार नहीं है, जब किसी नेता ने हनुमान की जाति को लेकर दावा किया हो। इससे पहले भी राज्य में अलग-अलग जातियों और पार्टियों के नेता हनुमानजी को अपनी जाति का बताते रहे हैं। क्या है यूपी में हनुमान की जाति की राजनीति? हनुमानजी असल में किस जाति से हैं? कौन-कौन सी जातियां दावा करती हैं? भास्कर एक्सप्लेनर में जानिए इन सभी सवालों के जवाब… सवाल 1- हनुमानजी या किसी अन्य देवता की जाति को लेकर कब-कब विवाद हुआ?
जवाब- यह पहली बार नहीं है, जब हनुमानजी की जाति बताई गई। इससे पहले भी अलग-अलग जातियों और पार्टियों के नेता हनुमानजी के अलग-अलग जाति के होने का दावा करते रहे हैं। इसमें खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम भी शामिल है। हनुमानजी की जाति से जुड़े नेताओं के बयान पढ़िए… 1. साल 2018 में राजस्थान विधानसभा चुनाव प्रचार में अलवर के मालाखेड़ा में एक सभा को संबोधित करते हुए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने हनुमानजी को दलित, वनवासी, गिरवासी और वंचित बताया था। उन्होंने कहा था कि बजरंगबली ऐसे लोक देवता हैं, जो स्वयं वनवासी हैं, निर्वासी हैं, दलित हैं, वंचित हैं। भारतीय समुदाय को उत्तर से लेकर दक्षिण तक और पूरब से लेकर पश्चिम तक सबको जोड़ने का काम बजरंगबली करते हैं। योगी के इस बयान के बाद हनुमानजी की जाति को लेकर खूब विवाद हुआ था। ब्राह्मण समाज ने योगी आदित्यनाथ को लीगल नोटिस भेजकर माफी मांगने को कहा था। विवाद होने के बाद तब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष नंद कुमार साय ने कहा था कि भगवान हनुमान आदिवासी थे। 2. साल 2018 में ही बाबा रामदेव ने झारखंड की राजधानी रांची में थे। वहां उनसे पत्रकारों ने हनुमानजी की जाति को लेकर सवाल किया। तब उन्होंने कहा था- वो रामभक्त थे। वे अष्ट सिद्धि के ज्ञानी होने के साथ क्षत्रिय भी थे। 3. हनुमानजी की जाति को लेकर चल रहे विवाद को लेकर तब शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने उन्हें ब्राह्मण बताया था। योगी आदित्यनाथ के दलित कहने की निंदा करते हुए उन्होंने कहा था कि त्रेतायुग में दलित शब्द था ही नहीं। सबसे पहले गांधी ने वंचित वर्ग को हरिजन कहकर पुकारा फिर बाद में मायावती ने दलित शब्द का इस्तेमाल करना शुरू किया। 4. 2018 में ही भाजपा नेता गोपाल नारायण सिंह ने कहा था कि हनुमान तो बंदर थे और बंदर पशु होता है। इसका दर्जा दलित से भी नीचे होता है। वो तो राम ने उन्हें भगवान बना दिया। यही क्या कम है? 5. साल 2021 में विकासशील इंसान पार्टी ने भगवान शिव को निषाद जाति का बताया था। तब पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता देव ज्योति ने कहा था- वेद-पुराण में इस बात का वर्णन किया गया है कि देवों के देव भगवान महादेव निषाद जाति के थे। उनके निवास स्थान यानी कैलाश पर्वत को भी निषाद शिखर कहा गया है। सवाल 2- हनुमानजी के अलग-अलग जाति के होने के पीछे क्या तर्क दिए जाते हैं? जवाब- हनुमानजी के अलग-अलग जातियों के होने के पीछे सभी पक्ष दावे के साथ तर्क भी रखते हैं। सवाल 3- हनुमानजी की जाति क्या है या उनकी कोई जाति नहीं? जवाब- हनुमानजी की जाति के सवाल के जवाब में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी कहते हैं- भगवान की कोई जाति नहीं होती। आपने कभी देखा है कि भगवान श्रीकृष्ण ने यादव लिखा हो, भगवान राम ने सिंह या क्षत्रिय लिखा हो। अध्योया के हनुमागढ़ी के गोविंदगढ़ पट्‌टी बसंतीय के महंत स्वामी महेश योगी ने बताया कि हनुमानजी को किसी जाति में नहीं बांध सकते। किसी ग्रंथ में हनुमानजी या दूसरे भगवान की जाति का उल्लेख नहीं। ये सब चीजें हमने बनाई हैं और हम अपने निजी स्वार्थ के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। यह ठीक नहीं है। वेद-पुराण और धार्मिक ग्रंथों में कहीं भी हनुमानजी की जाति का उल्लेख नहीं है। श्रीराम चंद्र जी और श्रीकृष्ण जी की जाति गणना तक नहीं कहीं नहीं मिलती। इसके अलावा ध्यान देने वाली बात यह भी है कि हनुमानजी के पात्र का जिक्र सबसे पहले वाल्मीकि के लिखे रामायण महाकाव्य में मिलता है। इसमें कहीं भी हनुमानजी की जाति का जिक्र नहीं है। रामायण में उनको शिव का अवतार बताया गया है। उनके पिता वानरों के राजा केशरी थे और माता अंजनी। सवाल 4- हनुमान के वानर जाति के होने के क्या सबूत मिलते हैं? जवाब- रामायण के मुताबिक, हनुमान का जन्म कपि नाम की वानर जाति में हुआ था। शोध के मुताबिक, करीब 9 लाख साल पहले भारत में ऐसी वानर जाति मौजूद थी। हालांकि, यह आज से करीब 15 हजार साल पहले लुप्त हो गई थी। इस जाति का नाम भी कपि मिलता है। इसी आधार पर रामायण में हनुमान सहित सुग्रीव और अंगद के कपि जाति को लाखों साल पहले के वानर प्रजाति से जोड़ा जाता है। सवाल 5- हनुमानजी के जन्मस्थान को लेकर क्या विवाद है? जवाब- साल 2021 में हनुमान के जन्मस्थान को लेकर कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच विवाद छिड़ गया था। दोनों राज्यों का अब भी हनुमान के जन्म को लेकर अपना-अपना दावा है। कर्नाटक का दावा: कर्नाटक का दावा है कि हंपी से करीब 25 किमी दूर स्थित आज का अनेगुंडी गांव ही किष्किंधा नगरी है। यहीं पवन-पुत्र हनुमान का जन्म हुआ था। आंध्र प्रदेश का दावा: आंध्र प्रदेश के तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम का दावा है कि पुराणों और शास्त्रों के मुताबिक हनुमान का जन्मस्थान तिरुमाला की 7 पहाड़ियों में से एक अंजनाद्री पर है। इन जगहों पर भी किया जाता है दावा- —————————– यह खबर भी पढ़ें ‘मंत्री आशीष पटेल के विभाग ने 25-25 लाख वसूले’, राज्यपाल से बोलीं सपा विधायक पल्लवी पटेल, कहा- SIT से जांच कराई जाए योगी सरकार में प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल के खिलाफ उनकी ही साली पल्लवी पटेल ने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से शिकायत की है। बुधवार को सिराथू से सपा विधायक और अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल ने इसी सिलसिले में राज्यपाल से मुलाकात की। मंत्री आशीष पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी SIT जांच की भी मांग की है। यहां पढ़ें पूरी खबर

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