हफ्ते में 5 दिन की ड्यूटी की मांग को लेकर हड़ताल पर रहे सरकारी बैंक के मुलाजिम

भास्कर न्यूज | जालंधर गणतंत्र दिवस के अगले ही दिन सरकारी बैंकों में काम ठप रहा। हर हफ्ते 5 दिन की ड्यूटी की मांग को लेकर मुलाजिम हड़ताल पर रहे। मंगलवार को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर की गई हड़ताल से जिले की बैंक शाखाओं में पब्लिक डीलिंग प्रभावित हुई। ऑनलाइन बैंकिंग जारी रही है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की सिविल लाइंस में सेक्रेटेरिएट ब्रांच में बैंक मुलाजिमों ने रोष रैली की है। ये हड़ताल एक दिन की है। अब 28 जनवरी से रेगुलर काम होगा।रैली में नेताओं ने कहा कि पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग पुरानी है। सरकार और बैंक प्रबंधन के साथ हुए द्विपक्षीय समझौते में इस मांग को स्वीकार किया जा चुका है। सरकार की तरफ से इस मांग को लागू करने में जानबूझकर देरी की जा रही है। जब देश के अधिकांश सरकारी विभागों में पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू है। बैंक कर्मियों के साथ यह भेदभाव किया जा रहा है। बैंक मुलाजिमों ने देश की आर्थिक तरक्की में अहम हिस्सेदारी दी है। उधर, बैंकों में वर्कलोड, बढ़ रहे चैलेंज व 5 दिन की हफ्ते में वर्किंग न होने से पैदा हुई दिक्कतों पर रोशनी डाली गई। रैली में कामरेड विनय डोगरा, विनोद शर्मा, बलजीत कौर, एचएस वीर, राजकुमार भगत, रमेश भगत, आकाश बख्शी, मुनीश कुमार, राजेश, हनी जाखू, सुनील कपूर, अतुल लड़ोइया और अशोक कुमार व अन्य मौजूद रहे। मंगलवार को भारतीय स्टेट बैंक की मेन ब्रांच में रोष रैली के दौरान मुलाजिम। रोष प्रदर्शन के दौरान इन मुद्दों पर भी रहा फोकस .निजीकरण पर रोक : सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण और विनिवेश के प्रयासों की कड़ी निंदा की गई। .श्रम कानून : श्रम कानूनों में संशोधन को श्रमिक विरोधी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की गई। .भर्ती की कमी : बैंकों में कर्मचारियों के रिक्त पड़े पदों के कारण मौजूदा स्टाफ पर बढ़ते मानसिक दबाव और कार्यभार का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया।

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