‘हमारे अंदर की स्थिति क्या है, हमें यह जानने का प्रयास करना चाहिए’

भास्कर न्यूज | राजनांदगांव जैन बगीचे के उपाश्रय भवन में मुनि विनय कुशल श्रीजी के शिष्य मुनि वीरभद्र (विराग) श्रीजी ने रविवार को कहा कि हम जगत के साम्राज्य के लिए लड़ रहे हैं किन्तु उस परमसत्ता के लिए नहीं लड़ रहे हैं जिसकी वजह से हम हैं। हम अपनी आत्मा के साम्राज्य के लिए, परमात्मा के साम्राज्य के लिए नहीं लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम पौराणिक धर्म को छोड़ आधुनिकता की ओर भाग रहे हैं। कहा कि मार्ग को किसी तरह बाधित नहीं होने देना चाहिए। हमें पौराणिक धर्म की ओर ध्यान देते हुए उसके मार्ग का बाधक नहीं बनना चाहिए। उसका मार्ग निष्कंटक और साफ रहे तभी वह हमें आनंद दे सकेगा। कहा कि हमारे अंदर हर पल आनंद बना रहना चाहिए। हम सुख के पीछे दौड़ रहे हैं किंतु सुख कहां है, यह किसी को नहीं पता। हम भौतिक चीजों में सुख ढूंढ़ रहे हैं। हम सीमेंट को जोड़ने वाला मानते हैं जबकि सीमेंट, दो इंटों के बीच की दूरी बढ़ाता है। हम वास्तविक सुख आध्यात्मिक अर्थात आत्मिक सुख से दूर रह रहे हैं। कोई ना कोई चीज है जो हमारे भीतर के सुख से हमको दूर कर रही है। हम हर क्षण मौत के करीब आते जा रहे हैं, किंतु हम अपने अंदर की स्थिति सुख से अनजान है। हमें यह जानने का प्रयास करना चाहिए कि हमारे अंदर की स्थिति क्या है। तत्वों को जानने का प्रयास करें: मुनि श्रीजी ने कहा कि हर क्षण का जबरदस्त आनंद लें। तत्वों को जानने का प्रयास करें। यदि आप तत्वों की वास्तविक्ता को जान जाते हैं तो भीतर आनंद ही आनंद पाएंगे।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *