हरदा के स्वदेशी मेले पर कांग्रेस ने प्रशासन को घेरा:बोले- परीक्षा नजदीक होने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी

हरदा जिला मुख्यालय के मिडिल स्कूल ग्राउंड पर 4 से 14 जनवरी तक स्वदेशी जागरण मंच द्वारा आयोजित स्वदेशी मेले को लेकर कांग्रेस ने जिला प्रशासन की अनुमति पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि परीक्षा समय नजदीक होने के बावजूद स्कूलों के सामने मेले की अनुमति देकर छात्रों की पढ़ाई प्रभावित की जा रही है। 11 दिनों तक चलेगा स्वदेशी मेला स्वदेशी जागरण मंच की ओर से आयोजित इस मेले में करीब 130 दुकानें लगाई गई हैं। इनमें स्थानीय उत्पादों के साथ क्रॉकरी, हैंडलूम, गर्म कपड़े, फूड स्टॉल और बच्चों के लिए झूले लगाए गए हैं। मेला कुल 11 दिनों तक चलेगा। कांग्रेस प्रवक्ता आदित्य गार्गव ने मेले की अनुमति पर आपत्ति जताते हुए कहा कि शहर के एकमात्र कन्या शाला और खेड़ीपुरा स्कूल भवन के सामने स्थित मैदान पर मेला लगाने की अनुमति कैसे दी गई। उन्होंने कहा कि वार्षिक परीक्षाओं का समय नजदीक है और ऐसे में यह मेला छात्रों की पढ़ाई में बाधा बन रहा है। मध्यम और निम्न आय वर्ग के बच्चे पढ़ते हैं स्कूलों में आदित्य गार्गव ने बताया कि इन स्कूलों में मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं। मेले की वजह से छात्राओं को स्कूल आने-जाने में परेशानी हो रही है और पढ़ाई का माहौल भी प्रभावित हो रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता ने जिला प्रशासन से अपील की कि वह बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए मेले की अनुमति पर पुनर्विचार करे, ताकि परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को किसी तरह की परेशानी न हो। शिक्षा सुधार को लेकर हाल ही में हुई थी बैठक गौरतलब है कि मंगलवार को कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने शिक्षा में गुणात्मक सुधार को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों और प्राचार्यों की बैठक ली थी। बैठक में उन्होंने शिक्षकों से परीक्षा परिणाम बेहतर बनाने और कमजोर विषयों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए थे। कलेक्टर ने कहा था कि प्री-बोर्ड परीक्षा के बाद विद्यार्थियों के कमजोर विषयों पर चर्चा कर उन्हें प्रश्न पत्र हल करने के बेहतर तरीके बताए जाएं, ताकि बोर्ड परीक्षाओं में अच्छे परिणाम आ सकें। कमजोर परिणाम पर कार्रवाई की चेतावनी कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने स्पष्ट किया था कि आगामी बोर्ड परीक्षाओं में कमजोर परिणाम लाने वाले शिक्षकों के खिलाफ पदावनति की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए कमजोर परीक्षा परिणाम वाले स्कूलों के शिक्षकों को अभी से नोटिस देने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने दो टूक कहा था कि जिले के किसी भी स्कूल का कमजोर परीक्षा परिणाम स्वीकार नहीं किया जाएगा और शिक्षकों को पूरी तल्लीनता से विद्यार्थियों के साथ मेहनत करनी होगी।

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