ओटीटी पर रिलीज होने जा रही फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ के विरोध में हरदा में ब्राह्मण समाज ने प्रदर्शन किया। सोमवार को समाज के लोग सड़क पर उतरे और फिल्म के नाम तथा संवादों को आपत्तिजनक बताते हुए विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने शहर के परशुराम चौक पर फिल्म का पुतला फूंका। इसके बाद वे कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां शंख बजाकर विरोध जताया। समाज के सदस्यों ने प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा, जिसमें फिल्म पर रोक लगाने की मांग की गई। सर्वब्राह्मण समाज के जिलाध्यक्ष सुनील तिवारी ने कहा कि यह प्रदर्शन सरकार और प्रशासन को जगाने के लिए किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि फिल्म इसी नाम से या नाम बदलकर भी रिलीज की गई, तो समाज सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगा और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। आरोप- धार्मिक भावनाएं आहत हो रही
ब्राह्मण समाज के सदस्यों ने कहा कि शंख बजाकर उन्होंने “युद्ध का आगाज” कर दिया है। उनका कहना था कि यदि फिल्म पर रोक नहीं लगाई गई तो आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। समाज का मानना है कि बार-बार सनातन धर्म की आस्था पर हमला किया जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर वे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। परशुराम सेना के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष सुधीर शर्मा ने बताया कि यह फिल्म एक विशेष वर्ग को बदनाम करने का प्रयास है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। इसी वजह से फिल्म के नाम और कंटेंट को लेकर तीखा विरोध किया जा रहा है। भ्रष्टाचार जैसे आरोप दर्शाए गए
शर्मा ने आगे कहा कि फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ में एक ऐसे किरदार को दिखाया गया है, जो धार्मिक पहचान से जुड़ा हुआ है और उस पर भ्रष्टाचार जैसे आरोप दर्शाए गए हैं। फिल्म के नाम और कथानक के जरिए पंडित समाज और सनातन धर्म की छवि को गलत तरीके से पेश किया गया है। समाज का कहना है कि फिल्म के ट्रेलर में मनोज बाजपेयी को पुलिस वर्दी में “घूसखोर पंडित” के रूप में दिखाया गया है। यह सीधे तौर पर उच्च पदों पर कार्यरत ब्राह्मण अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भ्रष्ट सिद्ध करने का प्रयास है। इसे केवल एक फिल्मी प्रस्तुति नहीं, बल्कि एक पूरे समुदाय और सरकारी तंत्र में कार्यरत ब्राह्मण अधिकारियों की सामूहिक छवि पर हमला माना जा रहा है।


