हरमू नदी के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण होने के बाद अब ऑपरेशन -मेंटनेंस का मामला कानूनी पचड़े में फंस गया है। दरअसल, नदी के जीर्णोद्धार पर नगर विकास विभाग की एजेंसी जुडको ने 85 करोड़ रुपए फूंक दिए हैं। करीब 10.50 किमी. लंबी नदी के सौंदर्यीकरण का काम छह वर्ष पहले ही पूरा हो गया। मुंबई की ईगल इंफ्रा कंपनी ने काम खत्म करने के बाद पांच वर्ष तक ऑपरेशन और मेंटनेंस भी किया। लेकिन, जब जुडको को नदी हैंडओवर लेने के लिए पत्र लिखा तो जुडको ने इनकार कर दिया। अब निर्माण कंपनी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कंपनी ने जुडको पर 35 करोड़ रुपए बकाया होने का दावा ठोका है। अदालत से पैसे दिलाने का निर्देश देने का आग्रह किया है। इस मामले पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस. रामचंद्र राव और जस्टिस दीपक रोशन की अदालत सुनवाई कर रही है। 9 जून को इस मामले पर विस्तृत सुनवाई होगी। इधर, हरमू नदी में करीब 82 छोटी- बड़ी नालियों का गंदा पानी और कचरा अभी भी गिर रहा है। मेंटनेंस का पैसा नहीं मिलने पर कंपनी ने काम बंद कर दिया है। साफ-सफाई पूरी तरह ठप है, इसका नतीजा है कि नदी पूरी तरह नाले में तब्दील हो गई। उद्गम स्थल से स्वर्णरेखा नदी में मिलने तक पूरी नदी गंदे नाले में तब्दील हो गई
ललगुटवा में हरमू नदी के उद्गम स्थल से चुटिया स्थित इक्कीसो महादेव मंदिर के पास स्वर्णरेखा नदी में मिलने तक हरमू नदी अब नाले में तब्दील हो गई है। डीपीआर ही गलत… 82 नाली में 6 का पानी साफ
हरमू नदी के जीर्णोद्धार के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) ही गलत बनाई गई। क्योंकि, नदी के किनारे स्थित 65 मुहल्लों की 82 छोटी- बड़ी नालियों के गंदे पानी को ट्रीटमेंट कर नदी में छोड़ना था। लेकिन, डीपीआर के अनुसार मात्र 6 बड़ी नालियों को ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से जोड़ा गया। इन नालियों से आने वाले 10 मेगालीटर प्रति दिन (एमएलडी) गंदे पानी का ही ट्रीटमेंट सात एसटीपी में हो रहा है। आकलन के मुताबिक रोजाना करीब 100 एमएलडी (10 करोड़ लीटर) गंदा पानी सीधे नदी में जा रहा है। कई घरों के सेप्टिक टैंक की गंदगी भी नदी में जा रही है। खटाल और घरों का कचरा भी फेंका जा रहा है। हाईकोर्ट को भी नदी की सफाई की दी गई गलत जानकारी, चारों ओर कचरा व गंदगी की भरमार
हाईकोर्ट में जल स्रोतों की सफाई से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से हरमू नदी की सफाई की जानकारी दी गई है। इससे संबंधित तस्वीर भी अदालत में सौंपी गई थी। लेकिन दैनिक भास्कर ने चार दिनों तक सच्चाई की पड़ताल की, तो कहीं भी नदी को साफ करते सफाईकर्मी नहीं दिखे। 7 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में से 5 चल रहे थे। दो प्लांट में चारो ओर कचरा जमा है। नदी के अधिकतर हिस्से में कचरा दिखा। नदी में नाले का संगम… करमचौक से विद्यानगर को जोड़नेवाले बड़े पुल के दोनों तरफ और हरमू विद्युत शवदाहगृह के पीछे स्थित दर्जनों खटाल से गोबर सीधे नदी में जा रहा है। सबसे खराब स्थिति करम चौक से कडरू पुल तक है। इस क्षेत्र में मरे हुए जानवर, घरों का कूड़ा-कचरा, मेडिकल वेस्ट भी नदी में ही फेंका हुआ है। करमसोकड़ा, करम चौक, विद्यानगर, चाला नगर, हरमू कॉलोनी, हिंदपीढ़ी नदी ग्राउंड, कडरू पुल, अमरावती कॉलोनी से स्वर्णरेखा नदी तक पानी काला है।


