हरियाली तबाह करने का खेल…14 एकड़ में मिला जंगल:भोपाल के मस्तीपुर में पहले फाइलों में नहीं थे 6 हजार पेड़; जांच में सामने आए

भोपाल की ईटखेड़ी सड़क पंचायत का गांव मस्तीपुरा। कुछ दिन पहले तक इस गांव में फाइलों में ही 6 हजार पेड़ थे, लेकिन शिकायत के बाद जब मामले का खुलासा हुआ तो 14 एकड़ का जंगल मिल गया। जांच में जंगल और पेड़ दोनों सामने आए। शिकायत करने वाले जिला पंचायत उपाध्यक्ष मोहन सिंह जाट के साथ शनिवार को वन, खनिज, राजस्व, पर्यावरण और स्थानीय प्रशासन के अमले ने यह जांच की। बता दें कि जिपं उपाध्यक्ष जाट ने कुछ दिन पहले कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह से शिकायत की थी। कहा था कि मस्तीपुरा के खसरा नंबर-2 पर कोपरा/मुरम के लिए लीज दी गई है, लेकिन इस जमीन पर सागौन के पेड़ लगे हैं। अन्य पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को क्षति पहुंचेगी। शिकायत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का भी उल्लेख किया गया। कहा कि प्रधानमंत्री खुद पेड़ लगा रहे हैं। दूसरी ओर, भोपाल में इन पेड़ों को कटवाने का काम हो रहा है। ग्राम पंचायत की ग्राम सभा की बैठक में प्रस्ताव भी पास नहीं किया गया। बावजूद लीज दे दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि इस लीज को निरस्त किया जाए, अन्यथा हम सब मिलकर एक जन आंदोलन करेंगे। तब तक यह आंदोलन होगा, जब तक कि लीज निरस्त न हो जाए। जिपं उपाध्यक्ष जाट की शिकायत के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आया और शनिवार को जांच करने के लिए गांव पहुंचा। जांच में सामने आया कि बैरसिया विधानसभा क्षेत्र के इस गांव में मुरम-कोपरा खदान को नियमों को दरकिनार करते हुए मंजूरी दे दी गई है। 6 हजार पेड़ खड़े, 14 एकड़ में पूरा जंगल
जांच में पता चला कि हजारों सागौन समेत अन्य पेड़ यहां लगे हैं। इनकी संख्या 6 हजार से ज्यादा है, जो 14 एकड़ में फैले हैं। यही पर खनन की अनुमति दी गई। यानी, जंगल को फाइलों में ही गायब कर दिया गया था। सबने अनदेखी की
खनन के लिए लीज देने से पहले पटवारी समेत कई स्तर पर पड़ताल होनी चाहिए। सागौन समेत अन्य पेड़ होने की स्थिति में लीज निरस्त कर दी जाती है। इस पर पटवारी से लेकर राजस्व विभाग और खनिज विभाग स्तर तक चूक हुई। कोई आपत्ति नहीं होने पर कलेक्टर ने भी अनुमति दे दी। मामला सामने आने के बाद अब खदान की लीज को निरस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस संबंध में पीसीबी ने भी अपने रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी है।

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