हर कदम पर खतरा : गड्ढों और अंधेरे ने छीना लोगों का चैन

भास्कर न्यूज | जालंधर शहर के लम्मा पिंड से लेकर जंडू सिंघा रोड तक की सड़कों की हालत अत्यंत खराब है, जिससे राहगीरों से लेकर स्थानीय दुकानदारों तक सभी बेहद परेशान हैं। सड़कों पर इतने गड्ढे हैं कि यह कहना मुश्किल हो गया है कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क। यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि वर्षों से चली आ रही है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से इस ओर कोई गंभीर कदम नहीं उठाया गया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लोग रोजाना दुर्घटनाओं के खतरे से दो-चार हो रहे हैं, लेकिन अधिकारी समस्या को देखकर भी अनदेखा कर रहे हैं। इस खराब सड़क की हालात का सीधा असर थ्री स्टार पैराडाइज कॉलोनी, गुलमोहर सिटी, हरदियाल नगर, प्रेम नगर, थ्री स्टार गुलमोहर सिटी समेत कई रिहायशी इलाकों पर पड़ रहा है।सिर्फ सड़कों की हालत ही नहीं, बल्कि इस मार्ग पर स्ट्रीट लाइट्स की भी भारी कमी है। अंधेरे में सड़क पर चलना बेहद खतरनाक हो गया है। सुरक्षा की दृष्टि से चिंतित दुकानदारों को मजबूरन शाम 6 बजे के बाद अपनी दुकानें बंद करनी पड़ती हैं। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से बार-बार गुहार लगाई है, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं, समाधान नहीं। राम केवल शर्मा, जो पिछले 10–12 वर्षों से लम्मा पिंड चौक में लकड़ी और लोहे के दरवाजों का कारोबार कर रहे हैं, ने बताया कि क्षेत्र की सड़कों की हालत बेहद खराब है। उन्होंने कहा कि रात के समय खस्ताहाल सड़क पर चलते हुए लोग अक्सर चोट खाकर गिर जाते हैं। बरसात हो या सामान्य दिन, सीवरेज का पानी सड़कों पर जमा रहता है। गड्ढे इतने गहरे हैं कि पानी भर जाने पर दिखाई भी नहीं देते, जिससे हादसे होते हैं। स्थानीय निवासी डॉ. रमेश गलहोत्रा ने बताया कि लम्मा पिंड से जंडू सिंघा तक करीब 4 किलोमीटर का सफर जर्जर सड़क के कारण मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि यहां सड़क कम और गड्ढे ज्यादा हैं। इस बदहाल स्थिति की वजह से व्यापार ठप हो चुका है। अंधेरा होने पर लाइट न होने की वजह से मैं अपनी क्लीनिक शाम 6 बजे ही बंद कर देता हूं। यदि जल्द इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। स्थानीय नागरिक अमरिंदर सिंह ने सड़क की खस्ता हालत और अंधेरे पर चिंता जताते हुए कहा कि सड़क इतनी खराब है कि रात के समय यहां से गुजरना खतरे से खाली नहीं। स्ट्रीट लाइट न होने की वजह से लोग इस रास्ते से आने-जाने से कतराते हैं। अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व भी सक्रिय हो जाते हैं। दिन में तो गड्ढे किसी तरह दिख जाते हैं, लेकिन रात में राहगीरों को बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। सर्वे कर रिपेयर का काम चल रहा है। जैसे-जैसे सड़कों की खस्ता हालातों के बारे में पता चलता है वैसे ही समस्या का हल करवा रहे हैं। -इंजीनियर राकेश, नेशनल हाईवे अथॉरिटी

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