स्वच्छता सर्वेक्षण-2024 में झारखंड के सिर्फ दो शहरों को अवार्ड मिला है। राज्य की राजधानी रांची की स्थिति सबसे अधिक खराब रही। रांची 5 रैंक गिरकर 37वें पायदान पर पहुंच गया। सफाई के नाम पर हर माह करीब छह करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद रांची की ऐसी स्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अन्य शहरों का प्रदर्शन भी काफी निराशाजनक रहा। इसे देखते हुए अब पूरे राज्य की सफाई व्यवस्था और शहरों की आधारभूत व्यवस्था को सुदृढ़ करने की कवायद तेज हो गई है। नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने शुक्रवार को सभी नगर निकायों के कार्यों और वहां की कमियों की समीक्षा की। उन्होंने सभी निकायों के पदाधिकारियों को सफाई में सुधार का टास्क दिया। कहा कि निकायों में घरों से कूड़े के उठाव की मॉनिटरिंग ऑनलाइन होनी चाहिए। इसके लिए सभी निकायों के हर घर पर क्यूआर कोड या आरएफआईडी चिप लगाएं। कूड़ा वाहन जिस घर से कूड़ा उठाएगा, कोड या चिप को स्कैन कर लिया जाएगा। ऐसे में संबंधित घरों की एंट्री सॉफ्टवेयर में हो जाएगी। इसके बाद निकाय स्तर पर इसकी क्रॉस चेकिंग की जाए, ताकि थर्ड पार्टी सही काम कर रही है या नहीं इसकी जानकारी सामने आ सके। सचिव ने कहा कि हाट-बाजारों में सफाई का समय तय करें। कचरा उठाने के लिए आधुनिक वाहन खरीदने का प्रस्ताव भेजें, ताकि वाहनों की कमी न हो। सचिव ने कहा कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को सख्ती से लागू करने के लिए विभाग में एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जाएगी। यह कमेटी 15 दिनों में निकायों का सर्वे करके वहां की कमी और उसे दूर करने पर रिपोर्ट तैयार करेगी। उसी के अनुसार आगे संसाधन उपलब्ध कराने का काम किया जाएगा। बैठक में निगम प्रशासक सुशांत गौरव, डीएमए निदेशक नैंसी सहाय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। टैक्स चोरी रोकने के लिए भवनों का होगा सर्वे शहरों में स्थित सभी भवनों का एक बार फिर सर्वे होगा। दरअसल, रांची सहित अन्य निकायों में होल्डिंग टैक्स का असेस्मेंट एक दशक पहले हुआ है। इसके बाद कई भवन और मॉल में अतिरिक्त निर्माण हुआ। ऐसे में भवन मालिकों द्वारा बढ़े हुए क्षेत्रफल को रिवाइज्ड नहीं कराया गया, ताकि उन्हें कम टैक्स देना पड़े। लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा। नगर विकास सचिव ने होल्डिंग टैक्स के लिए एक ऐप बनाने का निर्देश दिया है। इस ऐप में निकायों में स्थित सभी प्रोपर्टी का डेटा अपडेट होगा। घरों का सर्वे करके भवनों का वर्तमान क्षेत्रफल ऐप में अपडेट होगा। इसके आधार पर टैक्स का आकलन होगा, ताकि निकायों के राजस्व में बढ़ोतरी हो सके। ये भी दिए गए निर्देश गढ़वा, चास, बड़हरवा पेयजल आपूर्ति योजना का डीपीआर बनाकर काम शुरू करें। जलापूर्ति योजनाओं और सेप्टेज का काम कर रहे कांट्रेक्टर काम में देरी करते हैं तो उसे नोटिस करें और डिबार करें। नई योजनाओं का टेंडर तीन माह के अंदर फाइनल करके बरसात के बाद काम शुरू कराने का निर्देश। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की योजनाओं का टेंडर 10 दिनों के अंदर जुडको को फाइनल करना होगा। जमीन अधिग्रहण, वन, रेलवे और विद्युत विभाग से एनओसी लेने के लिए डीसी के माध्यम से विभाग के अधिकारियों के साथ बैठकर कर समाधान निकालें।


