हर चीज तुरंत मिलने से कम हो रहा धैर्य, बन रहा युवाओं में बेचैनी की वजह

भास्कर एक्सपर्ट एक फोन पर खाना, कपड़े, मूवी, कैब, पढ़ाई का मटेरियल हर चीज तुरंत मिल जाती है। यही सब कुछ तुरंत मिलने की आदत अब युवाओं के मन पर असर डाल रही है। जब जिंदगी की हर चीज मोबाइल की स्पीड से नहीं चलती, तो बेचैनी बढ़ने लगती है। शहर के मनोचिकित्सकों के पास ऐसे कई युवा और प्रोफेशनल पहुंच रहे हैं, जो बिना किसी बड़ी वजह के तनाव, घबराहट, चिड़चिड़ापन और नींद न आने की शिकायत कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जब दिमाग को हर चीज जल्दी मिलने की आदत पड़ जाती है, तो इंतजार करना मुश्किल लगने लगता है। पढ़ाई, नौकरी, प्रमोशन या रिश्तों में समय लगता है, लेकिन अब कई लोग यह समय देने को तैयार नहीं हैं। यही उतावलापन धीरे-धीरे चिंता और डिप्रेशन का कारण बन रहा है। अगर परिवार समय रहते इसे समझ ले, तो स्थिति संभाली जा सकती है। जिंदगी कोई ऐप नहीं है, जिसे क्लिक करते ही इंसान को सबकुछ मिल जाए आज की तेज रफ्तार जिंदगी में सबसे ज्यादा जरूरत दिमाग को आराम देने की है। लगातार मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताने से दिमाग हर समय सक्रिय रहता है और उसे शांत होने का मौका नहीं मिलता इसलिए दिन में कुछ तय समय के लिए मोबाइल से दूरी बनाना जरूरी है। सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन बंद कर दें, ताकि नींद स्वाभाविक रूप से आ सके। छोटे-छोटे लक्ष्य बनाकर उन्हें एक-एक करके पूरा करें, इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और अनावश्यक दबाव कम होता है। यह समझना भी जरूरी है कि जिंदगी कोई ऐप नहीं है, जिसे क्लिक करते ही सब मिल जाए। सफलता, संतोष और सुकून धीरे-धीरे मेहनत और धैर्य से मिलते हैं। यह समस्या लाइफस्टाइल से जुड़ी है, जिसे समय रहते सही आदतों से बदला जा सकता है। डॉ. अंशुल, मनोचिकित्सक केस 1 : एचआर प्रोफेशनल को घेर लिया लगातार तनाव ने : निजी कंपनी में 26 वर्षीय एचआर प्रोफेशनल हर काम तुरंत निपटाने की कोशिश करती थी। उसे लगता था कि अगर जवाब देर से मिला तो वह पीछे रह जाएगी। ऑफिस से लौटने के बाद भी वह मोबाइल पर ईमेल और मैसेज चेक करती रहती। धीरे-धीरे उसकी नींद कम हुई। छोटी बातों पर गुस्सा आता। हर रात उसे बेचैनी होती। डॉक्टर के मुताबिक वह खुद पर जरूरत से ज्यादा दबाव बना रही थी। अब वह तय समय पर फोन दूर रखती है और काउंसलिंग ले रही है। केस 2 : प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र में बढ़ी चिंता : 21 वर्षीय छात्र दिन-रात प्रतियोगी परिक्षाओं की तैयारी करता था, लेकिन सोशल मीडिया पर दूसरों की सफलता देखकर परेशान हो जाता। उसे लगता कि अगर उसका रिजल्ट अच्छा नहीं आया तो वह असफल है। रात को देर तक फोन चलाने से उसकी नींद खराब हो गई। परिवार ने समझाया और स्क्रीन टाइम कम कराया। अब उसकी सोच में बदलाव आ रहा है। केस 3 :आईटी प्रोफेशनल में बढ़ा दबाव : आईटी कंपनी में काम करने वाला युवक हर प्रोजेक्ट का रिजल्ट तुरंत चाहता था। टीम के काम में थोड़ी देरी भी उसे बेचैन कर देती। मीटिंग से पहले घबराहट और तेज धड़कन होने लगी। उसे लगने लगा कि वह सब संभाल नहीं पाएगा। डॉक्टरों की सलाह पर नियमित दिनचर्या और मेडिटेशन से अब वह बेहतर महसूस कर रहा है।

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