हर शुक्रवार एक पंचायत या गांव की कहानी, आज पढ़िए घांस गांव के बारे में

भास्कर न्यूज | टोंक जिला मुख्यालय से 13 किलोमीटर दूर एनएच-116 टोंक–सवाई माधोपुर हाइवे पर स्थित है घांस गांव। यहां हर साल घांस भैरूं की सवारी निकाली जाती है। उसी से इस गांव की पहचान है। करीब 300 साल पुराने इस गांव का नाम घांस पड़ने का किस्सा भी दिलचस्प है, गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि कालांतर में यहां घास के बड़े-बड़े बीड़ (मैदान) थे। समय के साथ इन बीड़ों में आबादी बसती गई। सीआर रहे सोनू परिड़वाल ने बताया कि पंचायत की आबादी करीब 5500 है, जबकि मतदाता 3500 के करीब हैं। घांस गांव कृषि आधारित है। पशुपालन यहां का मुख्य व्यवसाय है। पंचायत में साक्षरता दर 70 प्रतिशत के करीब है। घांस मुख्यालय के 1371 हैक्टेयर सहित कुल 2780 हैक्टेयर भूमि पर फैले पंचायत के क्षेत्रफल में से 2102 हैक्टेयर भूमि पर खेती होती है। सोनू परिड़वाल समाजसेवा के लिए जिलास्तर पर सम्मानित हो चुके है। गांव के बारे में दिलचस्प किस्से भी हैं जिनमें भैंरूजी से जुड़ी कई चमत्कारी घटनाएं भी प्रचलित हैं। ग्रामीण बताते हैं कि एक बार भैंरूजी के गोटिया (घोड़ला) गिरफ्तारी के बावजूद संध्या आरती के समय जेल के ताले खुलने और गोटिया के भैंरूजी में ढोक लगाकर जेल लौट आने ने सभी को चौंका दिया था। 10 साल पहले चैत्र नवरात्र की नवमी के जागरण में एक श्रद्धालु की चोरी हुई बाइक भी भैंरूजी के धोक लगाने पर एक घंटे में मिल गई है। घांस भैरू के मेले में मान्यता है कि दर्शन और ढोक लगाने से प्राकृतिक आपदाओं, महामारी और ऊपरी बाधाओं से रक्षा होती है। गांव को आपदाओं और संकटों से बचाने के लिए भाईदूज पर घांस भैरू महाराज की प्रतिमा को 16 जोड़ी बैलों से भ्रमण कराया जाता है। घांस के अलावा पंचायत में खजुरिया, ऊंटीटाना, खलीलपुरा पापड़ा सहित कई गांव व ढाणियां है। घांस भैरु की तरह ही रामूला मठ भी आस्था का प्रमुख केंद्र है, जो ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रही है। प्राचीन बावड़ी के जल से स्नान करने पर चर्म रोग, दाद-खाज जैसी बीमारियां दूर होती हैं। ऊंटीटाना में देवजी का प्रसिद्ध स्थान है जहां हर साल जन्मोत्सव पर मेला लगता है, खजुरिया के नाहरनाड़ा में झिलाईवाले के भैंरुजी का स्थान और खजुरिया में तेजाजी महाराज और जिसमें भी लोगों की अटूट श्रद्धा है।

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