बसंत पंचमी का अबूझ सावा आज, जिले में 150 शादियां होंगी

भास्कर संवाददाता|टोंक जिले में बसंतोत्सव 23 जनवरी को मनाया जाएगा। अबूझ सावा होने से जिले में 150 से अधिक विवाह होने का अनुमान है। 41 दिनों बाद सिर्फ एक दिन के लिए ये आयोजन होंगे। इस दौरान शहर सहित गांवों में शहनाइयों की गूंज सुनाई देगी। इसे लेकर गुरुवार को घरों में हल्दी-मेहंदी जैसी रस्में हुई । पंडित मोहनलाल मेहंदवास के अनुसार 11 दिसंबर से शुक्र ग्रह के अस्त होने और 16 दिसंबर से 15 जनवरी तक मलमास रहने के कारण विवाह सहित शुभ कार्यों पर विराम लग गया था। अब 1 फरवरी को शुक्र ग्रह के उदय के बाद 53 दिनों के अंतराल के बाद 2 फरवरी से फिर विवाह सहित अन्य शुभ मुहूर्त शुरू होंगे। इस बीच बसंत पंचमी पर अबूझ मुहूर्त पड़ने से शादियां हो सकेंगी। डिग्गी में दो समाजों के सामूहिक विवाह सम्मेलन भी होंगे, जिसमें सैन समाज के विवाह सम्मेलन में 24 व सर्व समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन में 8 जोड़े विवाह बंधन में बंधेंगे। शहर में स्थित मैरिज गार्डन भी विवाह सम्मेलन को लेकर सजे नजर आए। अन्नपूर्णा गणेश मंदिर में भी भगवान प्रथम पूज्य को विवाह के कार्ड सौंपकर आमंत्रित किया गया। निर्विघ्न विवाह की कामना के साथ शादी वाले घरों में भगवान गणेश की स्थापना भी की गई। दो फरवरी को शुक्र उदय होगा, फिर 4 फरवरी को सावा पंडित पवन सागर ने बताया कि अबूझ मुहूर्त मानी जाने वाली बसंत पंचमी तिथि 22 जनवरी की रात 2:29 बजे से शुरू होकर 23 जनवरी की रात 1:47 बजे तक रहेगी। इस दिन बिना मुहूर्त देखे विवाह, गृह प्रवेश, नौकरी या व्यापार की शुरुआत, भूमिपूजन, वाहन अथवा किसी भी विशेष वस्तु की खरीद अत्यंत शुभ और फलदायी मानी गई है। सरस्वती पूजन का शुभ समय सुबह 7:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। इस बार मध्याह्न काल में उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र और शिव योग का संयोग बन रहा है। इसके बाद फिर 2 फरवरी से विवाह कार्यों की शुरुआत होगी। इसके चलते 4, 5, 10, 13, 19, 20, 21 फरवरी, 9, 10 व 11 मार्च को विवाह हो सकेंगे। 26 जनवरी को रामनवमी का अबूझ सावा होने से विवाह कार्य हो सकेंगे। शास्त्रों के अनुसार यह पर्व बसंत ऋतु के आगमन का सूचक है, जो प्रकृति में नई स्फूर्ति, हरियाली और खुशहाली लाता है। इस दिन मां सरस्वती शिक्षा, कला और संगीत की देवी की पूजा की जाती है। बसंत पंचमी देश के उत्तरी और मध्य क्षेत्रों में विशेष उत्साह के साथ मनाई जाती है। यह पर्व धार्मिक ही नहीं, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी लोगों को जोड़ने वाला माना जाता है। इस दिन संगीत से जुड़े कलाकार अपने वाद्य यंत्रों पर तिलक लगाकर मां सरस्वती की पूजा करेंगे।

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