हल्दीघाटी और रक्त-तलाई की बदहाली पर HC सख्त:CS, कलेक्टर-एसपी, कई विभागों समेत 16 को नोटिस; कहा-मूल स्वरूप नष्ट हो रहा

राजसमंद में स्थित देश की ऐतिहासिक विरासत हल्दीघाटी और रक्त तलाई के संरक्षण को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जोधपुर हाईकोर्ट ने हल्दीघाटी और रक्त तलाई के ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण शीर्षक से इस प्रकरण को स्वप्रेरित जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया है। जज पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जज संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने 16 दिसंबर 2025 को जारी आदेश में हल्दीघाटी की बदहाल स्थिति पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा- ऐतिहासिक धरोहरों पर आधुनिक निर्माण का दबाव बढ़ता जा रहा है, जो इनके मूल स्वरूप को नष्ट कर रहा है। हाईकोर्ट ने इन स्थलों के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि संरक्षण में लापरवाही संविधान और प्रचलित कानूनों का उल्लंघन है। मामले में कोर्ट ने पर्यटन विभाग, लोक निर्माण विभाग, केंद्रीय और राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, कलेक्टर-एसपी उदयपुर, एनएचएआई, भारतीय पुरातत्व विभाग, राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव, वन एवं पर्यावरण विभाग समेत 16 प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए अंतरिम निर्देश दिए हैं। पुरातात्विक अवशेष डामरीकरण के नीचे दबे कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि साल 2019 में सड़क विस्तार के दौरान हल्दीघाटी के संकरे ऐतिहासिक दर्रे को लगभग 40 मीटर चौड़े टू-लेन राजमार्ग में तब्दील कर दिया गया। इसके लिए पहाड़ काटकर सड़क बनाई और 200 से ज्यादा पेड़ हटा दिए। कई संभावित पुरातात्विक अवशेष डामरीकरण के नीचे दब गए। साथ ही भारी यातायात, डीजल, धुआं, मिट्टी का कटाव और पर्वत ढहने का खतरा भी बढ़ गया है। रक्त-तलाई की स्थिति दयनीय हाइकोर्ट ने रिपोर्ट में कहा- रक्त तलाई जिसे हल्दीघाटी युद्ध के चरम और बलिदान का प्रतीक स्थल माना गया है, वहां की मौजूदा स्थित दयनीय है। यहां ऊंची घास, टूटी बोतलें, कचरे के ढेर लगे हैं। यहां स्थित शहीदों की छतरियां उपेक्षा की शिकार हैं। पवित्र रक्त ताल सूखा पड़ा हुआ है, टाइलें भी टूटी हुई है। क्षेत्र में दिन में प्रेमी युगलों का ठिकाना बन जाता है। रात में शराबियों का अड्डा बन जाता है। रक्त तलाई के किनारे सीवरेज का पानी बह रहा है। नए निर्माण या विस्तार पर तुरंत रोक हाइकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अब क्षेत्र में किसी भी नए निर्माण या विस्तार पर तुरंत रोक लगा दी गई है। 15 दिन में सफाई अभियान चलाकर कचरा व घास हटाने के आदेश दिए गए हैं। पहाड़ियों व ऐतिहासिक ढलानों पर वाहनों की पार्किग पर तत्काल रोक लगाई गई है। 30 दिन में सीवरेज हटाने और जलभराव दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। इन स्थलों की 24 घंटे निगरानी के लिए केयरटेकर नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं। विस्तृत रिपोर्ट व डीपीआर की वर्तमान स्थिति पेश करने के भी निर्देश दिए गए हैं। इस संदर्भ में हाईकोर्ट ने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण नई दिल्ली, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग राजमार्ग प्राधिकरण सहित कुल 16 विभागों को नोटिस जारी किए है। इस मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *